शुक्र है, इस दुनिया में अभी भी कुछ लोग ऐसे हैं जो दूसरों के लिए निस्वार्थ भाव से कुछ करते हैं बिलकुल केरल के रहने वाले शाहजहां की तरह. शाहजहां पिछले कई सालों से केरल के Regional Cancer Centre में अपना रक्त दान कर रहे हैं.  

जब शाहजहां छोटे थे तब उनकी मां, उमाईबन की कैंसर से मृत्यु हो गई थी. जिसके बाद, बड़े होने पर शाहजहां ने अपना रक्त दान शुरू कर दिया.  

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शाहजहां दिन में सब्जी का स्टॉल लगाते हैं और दोपहर बाद वो RCC अस्पताल जाकर ज़रूरतमंदों की मदद करते हैं. वह अपने साथ डोनर्स को लाते हैं या कई बार फ़ोन पर कॉल कर के किसी डोनर से मदद मांगते हैं और अगर कुछ नहीं तो वो अस्पताल में आए मरीज़ों और उनके परिवारजनों की हर संभव तरीक़े से मदद करने में लग जाते हैं.   

शाहजहां सड़क पर चल रहे अंजान लोगों, सवारी का इंतज़ार टैक्सी ड्राइवर, अस्पताल के पास लोग या अपने घर के आस-पास के लोगों से रक्त दान करने के लिए पूछते रहते हैं. इन सालों में वो ऐसे कई सारे ग्रुप्स और लोगों के सम्पर्क में आए हैं जो ज़रूरत के समय में रक्त देने के लिए तैयार होते हैं. कई सारे कॉलेज स्टूडेंट्स से भी उनका परिचय है.    

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शाहजहां अस्पताल के मरीज़ों के लिए देवता समान है. अपने बेटे के इलाज के लिए आई ऊषा कहती हैं,   

“चार साल पहले, मैं अपने 27 वर्षीय बेटे के साथ तिरुवनंतपुरम आई थी जिसे रक्त का कैंसर था. मेरे पति की मृत्यु हो गई थी और मेरी बेटियों की शादी हो गई थी. मैं तिरुवनंतपुरम में किसी को भी नहीं जानती थी. मेरे बेटे को हर दिन बहुत खून की जरूरत थी. तब RCC के सुरक्षाकर्मी ने मुझे शाहजहां के बारे में बताया कि वह मदद कर सकते हैं. डेढ़ साल तक मैं अस्पताल में रही, शाहजहां ने हमारी हर दिन मदद की है. वह हमारे लिए जीवित देवता हैं.” 

शाहजहां हर दो-तीन महीने में अपना रक्त दान करते थे मगर जब उन्हें पता चला की प्लेटलेट्स की मांग अधिक थी तो उन्होंने फिर प्लेटलेट्स दान करना शुरू कर दिया.  

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उनकी सेवाओं को देखते हुए, केरल स्टेट एड्स कंट्रोल सोसाइटी ने शाहजहां को एक पुरस्कार से सम्मानित किया जिसे स्वास्थ्य मंत्री केके शैलजा ने पेश किया था.