कुछ दिनों पहले दिल्ली में एक मामला सामने आया था जिसमें एक 34 साल की महिला को एक प्राइवेट अस्पताल ने अस्पताल ख़ाली करने को बोला था. दरअसल महिला की मां की कोरोना के चलते 14 जून को मृत्यु हो गयी थी, उसके बाद महिला में भी कोरोना के लक्षण दिखने लगे और 18 जून को उन्हें अस्पताल में भर्ती किया गया. मगर अस्पताल ने उनका Covid-19 टेस्ट नहीं किया साथ ही उन्हें अस्पताल ख़ाली करने को बोला. महिला के पिता को जब कुछ ना सूझा तो उन्होंने दिल्ली हाई कोर्ट के एक वकील हेमंत गुलाटी को बुलाने का फैसला किया. गुलाटी की रिट के बाद दिल्ली हाई कोर्ट ने पीड़ित को साउथ दिल्ली के दूसरे प्राइवेट अस्पताल में ट्रांसफर करने का आदेश दिया साथ ही कोर्ट ने दिल्ली सरकार से इस पूरे मामले की जांच करने और अस्पताल के ख़िलाफ़ कार्रवाई करने के आदेश भी दिए. 

दिल्ली में तेज़ी से कोरोना फैलने के जिन मरीज़ों को अस्पताल ने एडमिट करने से मना कर दिया, उन्होंने मदद के लिए हेमंत गुलाटी को फ़ोन किया. हेमंत गुलाटी ने कोर्ट की मदद से ऐसे लोगों को अस्पताल में बेड दिलवाने में सहायता की. उन्होंने सोशल मीडिया के ज़रिये ये बात लोगों तक पहुंचाई कि वो ऐसे लोगों की, जिन्हें अस्पताल ने बेड देने से मना कर दिया है, मुफ़्त में कानूनी मदद करते हैं. 

Indian Express से गुलाटी बताते हैं, "मैंने यह काम शुरू किया क्योंकि मैं चाहता हूं किसी भी व्यक्ति का मौलिक अधिकार ख़तरे में ना आये. हाई कोर्ट में रिट दायर करके हम किसी के भी ख़िलाफ़ चाहे वो दिल्ली सरकार हो या कोई अस्पताल आदेश और निर्देश प्राप्त कर सकते हैं अगर वे सरकार द्वारा दी जा रही सुविधा नहीं दे पाते." 

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"जब से मैंने इस बात को सोशल मीडिया से लोगों तक पहुंचाया तब से मुझे कई फ़ोन आये. आज भी मुझे रोज़ 70 से 80 फ़ोन आते हैं." एक महिला, जिन्होंने उन्हें सुबह 4 बजे फ़ोन किया था, की बात बताते हुए गुलाटी बोले, "वह रो रहीं थीं. उनके पिता सफदरजंग अस्पताल के बाहर एक एम्बुलेंस में उसके साथ थे और अस्पताल ने उन्हें लेने से मना कर दिया था." 

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गुलाटी ने अस्पताल को फोन किया और बताया कि Delhi ‘Corona App’ में खाली बेड दिखा रहा है लेकिन डॉक्टर ने कहा कि अस्पताल में बेड नहीं हैं. इसके बाद गुलाटी ने तुरंत AIIMS में फ़ोन किया क्योंकि App में वहां बेड ख़ाली दिखा रहा था और AIIMS नें मरीज़ को सुबह 5 बजे भर्ती कर लिया." 

एक इंस्टाग्राम पोस्ट में गुलाटी बताते हैं, "4 जून की सुबह लगभग 1 बजे इंदर बजाज की 49 साल की मां को सांस लेने में तकलीफ़ होने लगी और उन्हें Covid-19 का शक हुआ. अगले 13 घंटों में परिवार उन्हें आसपास के 4 अस्पतालों में लेकर गए मगर सभी अस्पतालों ने उन्हें एडमिट करने से मना कर दिया.

घर वाले घंटों तक अस्पताल के बाहर इंतजार करते रहे कि शायद उन्हें बेड मिल जाए लेकिन उनकी सारी उम्मीदों पर पानी फिर गया. अस्पताल के अधिकारियों ने कहा की उन्हें निमोनिया है और उसके लिए दवाएं भी भेजीं, वह अभी भी अपनी जिंदगी की लड़ाई लड़ रही हैं."  

गुलाटी का मानना है कि दिल्ली सरकार का कोरोना App लोगों को और मुश्किल में डाल देता है. App में एक अस्पताल में बेड ख़ाली दिखाता है मगर वहां पहुंचने पर मालूम चलता कि वहां एक भी बेड नहीं है. 

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गुलाटी बेड को लेकर हो रही गड़बड़ को लेकर बोले, "आज(24 जून) सुबह App ने दिखाया कि दिल्ली के कुल 13,000 बेड में से 7000 बेड और 700 वेंटिलेटर में 250 ख़ाली हैं मगर जब कोई कोरोना वायरस का मरीज़ अस्पतालों में जाता है तो अस्पताल उनसे बेड ख़ाली ना होने की बात कह देता है. ऐसे में यही बात सामने आती है कि या तो अस्पताल सरकार को सही डाटा नहीं दे रहे हैं या सरकार का इन अस्पतालों पर कोई नियंत्रण नहीं है."  

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गुलाटी इस महामारी के समय लोगों की और मदद करना चाहते हैं. वो बोलते हैं, "अगर कोई मुझे फ़ोन करता है तो मेरा ये काम है कि जितनी जानकारी मुझे है सबका इस्तेमाल करके मैं सामने वाले की मदद करूं बिना ये देखे कि वो कौन है, ग़रीब है या अमीर. मेरा मानना है कि सही स्वास्थ्य सुविधा ना मिल पाना लोगों के मौलिक अधिकार छिनने जैसा है."