उत्तर प्रदेश की राजधानी में चलने वाली लखनऊ मेट्रो के डिब्बों को साफ़ करने के लिए अल्ट्रा वॉयलेट (पराबैंगनी) किरणों का इस्तेमाल करने वाली देश की पहली मेट्रो सेवा बन गई है. एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि न्यूयॉर्क मेट्रो द्वारा इस प्रणाली के सफ़ल परीक्षण से प्रेरणा लेते हुए,  यूपी मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (UPMRC) ने इस तकनीक को यहां लागू किया.

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UPMRC के प्रबंध निदेशक कुमार केशव ने बताया, ‘इससे पहले हमने मेट्रो यात्रा टोकनों को UV किरणों से सैनिटाइज़ करने का भी सफ़ल प्रयोग किया था, जिसे यात्रियों से काफ़ी सराहना मिली थी. अब UPMRC ने पूरी ट्रेन को ही अल्ट्रा वॉयलेट किरणों से सैनिटाइज़ करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. हम यात्रियों को आश्वस्त करना चाहते हैं कि लखनऊ मेट्रो, ट्रांसपोर्ट का सबसे सुरक्षित मोड है.’

उन्होंने कहा कि, लखनऊ मेट्रो देश की पहली मेट्रो परियोजना भी थी जिसने 'यूवी बॉक्स' के माध्यम से टोकन सेनिटेशन शुरू किया था. इस तकनीक को यूपी मेट्रो ने खुद विकसित किया था.

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UPMRC ने बताया कि, लखनऊ मेट्रो ने सैनेटाइज़ेशन उपकरण बनाने वाली एक निजी कंपनी के साथ मिलकर यूवी लैंप विकसित किया है जो कि पेराबैंगनी कीटाणुनाशक विकिरण प्रणाली पर काम करता है. इस उपकरण में 254 नेनो-मीटर तक की शॉर्ट वेवलेंथ वाली अल्ट्रवॉयलेट-सी किरणों के ज़रिए सूक्ष्म कीटाणुओं को नष्ट किया जाता है. ये किरणें इन सूक्ष्म जीवों के डीएनए व न्यूक्लीक एसिड को नष्ट कर इनका नाश कर देती हैं. 

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बताया गया कि पिछले साल अक्टूबर में DRDO ने इस उपकरण को मंज़ूरी दी थी. उस वक़्त सात मिनट में पूरे कोच की सफ़ाई हो गई थी. इस पहल की सबसे अच्छी बात ये है कि ये बहुत ही किफ़ायती है. मैनुअल सैनिटाइज़ेश के मुकाबले इसमें 40 गुना कम लागत आती है.