मध्य प्रदेश में पक्षियों की गिरती तादाद को रोकने के लिए राज्य सरकार ने सर्वे करने का निर्णय लिया है. बीते गुरुवार को 'पक्षी सप्ताह 2020' के समापन के बाद ये निर्णय लिया गया.

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'State of India's Birds 2020' की रिपोर्ट के मुताबिक़, देश की 12 प्रतिशत पक्षियों की प्रजाति को तुरंत संरक्षण की आवश्यकता है. पक्षियों की जनसंख्या में गिरावट को रोकने के लिए 'पेंच टाइगर रिज़र्व' ने 'सेन्ट्र्ल इंडियन बर्ड्स अकैडमी' (सीआईबीए) के साथ मिलकर पेंच लैंडस्केप की स्टडी करने का निर्णय लिया है. 

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ये दोनों संस्थाएं मिलकर 'पन्ना टाइगर रिज़र्व', 'कान्हा टाइगर रिज़र्व', 'सतपुड़ा टाइगर रिज़र्व', 'बांधवगढ़ टाइगर रिज़र्व', 'कुनो नेशनल पार्क', 'चंबल नेशनल सैन्चुअरी', 'गांधीसागर वाइल्डलाइफ़ सैन्चुरी', 'खेओनी वाइल्ड लाइफ़ सैंचुरी' और 'नौरादेही वाइल्डलाइफ़ सैन्चुरी' में सर्वे करेंगे. 

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Free Press Journal के मुताबिक़, लॉन्ग टर्म डेटा जमा करने के लिए इनमें से कई जगहों पर एक से ज़्यादा बार बर्ड सर्वे करवाया जाएगा. 

Birder अजय गाडेकर ने बताया-

मध्य प्रदेश में गिद्ध के कई Critically Endangered, Lesser Florican की Endangered प्रजातियां हैं. इसके अलावा India Skimmer, Sarus Crane जैसी Vulnerable प्रजातियां भी हैं. इनका संरक्षण तभी संभव है जब इन प्रजातियों के बारे में गहरी जानकारी होगी.

                    - अजय गाडेकर

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अजय ने ये भी बताया कि, वैसे तो पक्षी पूरे देशभर में फैले हुए हैं लेकिन उनका संरक्षण बेहद ज़रूरी है.