आज से करीब 30 साल पहले मणिपुर में एक परिवार ने अपनी 3 साल की मासूम बच्ची को बीमारी के चलते खो दिया था. परिवार ग़रीब था इसलिए समय पर बच्ची का इलाज नहीं करा सका था.

दरअसल, साल 1989 में इंफाल की रहने वाली 3 साल की थोईबी निंगथौजम की टाइफ़ॉइड के कारण मौत हो गई थी. मासूम थोईबी को तेज़ बुखार था, लेकिन आस-पास कोई सरकारी अस्पताल नहीं था. ग़रीब पिता के पास इतने पैसे भी नहीं थे कि वो मासूम बच्ची का इलाज निजी अस्पताल में करा सके. टाइफ़ॉइड बढ़ता गया और थोईबी की मौत हो गई.

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समय पर इलाज न मिलने से बहन को खोने का ये दर्द उसके तीन भाई पिछले 30 सालों से अपने सीने में दबाए हुए थे. वो अपनी बहन की याद में कुछ करना चाहते थे, ताकि वो हमेशा उनकी यादों में रह सके.

थोईबी के 3 भाईयों सुरजीत निंगथौजम, कुमारजीत निंगथौजम और हेमजीत निंगथौजम ने बहन की याद में मणिपुर की राजधानी इंफ़ाल में 50 बेड वाले एक अस्पताल की शुरुआत की है ताकि ग़रीबों और ज़रूरतमंदों को यहां फ़्री इलाज़ मिल सके.

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इस अस्पताल की शुरुआत 1 नवंबर से होने जा रही है. फ़िलहाल, यहां पर 3 डॉक्टर्स, 3 नर्स, 1 फ़ार्मासिस्ट और 2 सफ़ाई कर्मियों की नियुक्ति की गई है. अस्पताल में एक्स-रे और अल्ट्रासाउंड मशीनें भी होंगी. इस हॉस्पिटल में बड़ी बीमारियों और सर्जरी को छोड़कर सभी प्रकार के इलाज़ की सुविधा मिलेगी.

हॉस्पिटल में भर्ती मरीज़ों को सिर्फ़ दवाई के ही पैसे चुकाने होंगे. बाकी रहने, खाने से लेकर डॉक्टर और नर्सिंग फ़ीस सब कुछ फ़्री होगा. हॉस्पिटल तक आने-जाने के लिए मरीज़ों को फ़्री एम्बुलेंस सुविधा भी दी जाएगी.

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Yelhoumee Healthcare Pvt. Ltd. के डायरेक्टर सुरजीत ने कहा कि हम समय-समय पर ग़रीबों और ज़रूरतमंदों के लिए फ़्री मेडिकल कैंप भी आयोजित करते रहते हैं. हमारा हमेशा यही प्रयास रहता है कि मणिपुर के दूरदराज़ के इलाकों में रहने वाले हर ज़रूरतमंद को समय पर इलाज मिल सके.

इसी साल 13 अक्टूबर को इंफाल में 'Yellhoumee Healthcare' नाम से एक फ़्री मेडिकल कैंप लगाया गया था. इस दौरान कई ज़रूरतमंदों ने यहां फ़्री इलाज का लाभ उठाया.