क्या आप Whatsapp पर ख़बरों के लिंक पाने के​ लिए किसी को पैसे देंगे? अधिकतर लोगों का जवाब न ही होगा, क्योंकि Whatsapp पर दुनियाभर की ख़बरें ऐसे ही मुफ़्त में मिल जाती है, ऐसे में पैसे कौन देगा. सुनने से एक बेकार सा लगने वाले इस आइडिया को पीलीभीत के रहने वाले शिवेंद्र गौड़ ने सच कर दिखाया.

शिवेंद्र ने एक साल पहले Rocket Post Live नाम से Whatsapp न्यूज़ सविर्स चालू की थी, जिसके आज 11,400 Subscribers हैं. उत्तर प्रदेश के एक छोटे शहर, जिसकी आबादी महज़ 20 लाख के आस-पास है, वहां ऐसा सोचना भी अपने आप में बड़ी बात है.

कैसे काम करता है Rocket Post Live?

शिवेंद्र ने Scoopwhoop News से बताया कि Rocket Post, Whatsapp का ब्रॉडकास्ट फ़ीचर इस्तेमाल करती है. इस सर्विस को इस्तेमाल करने के लिए Subscribers के नंबर पर एक एक्टिवेशन कोड दिया जाता है, जिससे ये सर्विस चालू हो जाती है. इसकी सारी ख़बरें, हिन्दी में होती हैं और ​अधिकतर पीलीभीत केंद्रित ही होती हैं. इस सर्विस में लोगों को दिनभर विकास कार्य की ख़बरें, राजनीति, क्राइम और सामाजिक मुद्दों की ख़बरें मिलती हैं. इसके आलावा ब्रेकिंग न्यूज़ एलर्ट, 2 से 3 शहर की मुख्य ख़बरें और रोज़ रात 8 बजे हिन्दी न्यूज़ वीडियो बुलेटिन (3-5 मिनट).

शिवेंद्र ने बताया कि उनकी न्यूज़ सर्विस का वीडियो फ़ीचर लोग ज़्यादा पसंद करते हैं. अकसर लोग थोड़ी भी देरी होने पर फ़ोन और मेसेज करने लगते हैं.

कौन पढ़ता है ये ख़बरें?

Express

शिवेंद्र ने बताया कि उनके 11,400 Subscribers में करीब 3,000 छात्र हैं, जिन्हें ये सर्विस मुफ़्त में दी जाती है. इसके आलावा लगभग 8,400 Subscribers इस सर्विस का 100 रुपये प्रति वर्ष देते हैं. उनके Subscribers ज़्यादातर वो लोग हैं, ​जो स्मार्टफ़ोन अच्छे से इस्तेमाल करते हों और जो टीवी या अख़बारों से ख़बर पढ़ना पसंद न करते हों. उनके रीडर्स सरकारी कर्मचारी से लेकर पुलिस अधिकारी तक सब हैं.

कैसे चलती है ये कंपनी?

शिवेंद्र ने बताया कि Subscribers से उन्हें करीब 8 लाख रुपये सालाना मिलते हैं. जिसमें से वो अपने सात लोगोंं के स्टाफ़ की मासिक सैलरी (Rs 3000-Rs 5000 प्रति माह) और बाकी आॅपरेशनल ख़र्च निकालते हैं. इसके बाद इनके पास करीब 20 हज़ार रुपये मासिक बचता है. शिवेंद्र का लक्ष्य इस साल के अंत तक अपने Subscribers 18 हज़ार तक करने का है.

कैसे आया ये आइडिया?

शिवेंद्र ने पीलीभीत के पॉलीटेक्निक इंस्टीट्यूट से इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियरिंग में डिप्लोमा किया है. शुरुआत में वो लोकल टीवी केबल में नौकरी करते थे. ख़बरों में रुचि होने के कारण वो न्यूज़ चैनल में बतौर सूत्रधार का काम करने लगे. कुछ वक़्त के लिए वो साल 2005 में समाजवादी पार्टी के जिला प्रवक्ता भी बने.

शिवेंद्र पत्रकारिता करना चाहते थे और अपना अख़बार भी खोलना चाहते थे. बाद में उन्होंने जाना कि ये काम बिना फंडिंग के संभव नहीं है, जिसके बाद उन्होंने इस डिजिटल माध्यम को टटोलना शुरु किया और ये न्यूज़ सर्विस संभव हो पाई. शिवेंद्र उसी कमाई में साप्ताहिक पत्रिका भी छपवाते हैं.

कैसे मिले एक बेहतर आइडिया और किस्मत एक साथ?

जब शिवेंद्र ने ये सर्विस लॉन्च की तब यूपी में इलेक्शल पोल अभियान चल रहा था. लोगों को राजनीति की जानकारी चाहिए थी और जानना था कि किस पार्टी की लहर ज़्यादा है. इन्होंने बीजेपी के कई छोटे-छोटे इंटरव्यू करे, जो काफ़ी वायरल हुए. इससे Subscribers बड़ी तेज़ी से बढ़े. शिवेंद्र ने कहा कि वो अपने कंटेंट और सर्विस को बेहतर बनाते रहेंगे.

Source- SW News