समाधान की ओर पहला कदम बढ़ाने से पहले समस्या के अस्तित्व को स्वीकारना पड़ता है. अच्छी बात है कि वित्तमंत्री ये मान रही हैं कि ऑटोसेक्टर बुरे दौर में है, वरना कुछ दिनों पहले तक पार्टी के लोग कैसा बुरा दौर, कौनसा बुरा दौर, मैं किसी बुरे दौर को नहीं जानता वाले मोड में थे.

Source: Business Today

वित्तमंत्री निर्मला सीतारमन ने कहा कि देश का ऑटोसेक्टर हिला हुआ है और इसके लिए ओला-ऊबर जैसे App ज़िम्मेदार हैं. मिलेनियल्स(आज-कल के लौंडे लपाटे) कैब सर्विस का इस्तेमाल कर रहे हैं, वो गाड़ी ख़रीदना पसंद नहीं कर रहे हैं. कैब सर्विस उन्हें किफ़ायती महसूस करती है.

पहले आंकड़ों से उनके बयान को ग़लत साबित करते हैं, बाद मे ट्रोलिंग की बात करेंगे. एक रिपोर्ट के अनुसार पिछले साल के दूसरी छमाही में और इस साल के पहले छमाही में ओला-ऊबर ने 4 प्रतिशत का ग्रोथ हासिल किया है, इस प्रगति को विशेषज्ञ औसत से भी कम मानते हैं. दूसरी ओर सोसाइटी ऑफ़ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्यूफैक्चरर्स के आंकड़ों के अनुसार पिछले साल कुल बिक्री में तकरीबन 8 फ़िसदी की गिरावट दर्ज की गई.

निर्मला सीतारमन का बयान आधारहीन तथ्यों के भरोसे तो था ही कॉमन सेंस से भी कोसों दूर था. लोगों ने सवाल उठाए कि ओला-ऊबर की वजह से ट्रक-ट्रेक्टर, टू-व्हिलर गाड़ियां आदि कंपनियों की बिक्री कैसे कम हो गई. सोशल मीडिया की दुनिया ट्रोलिंग के मामले में बेहद निर्मम बर्ताव करती है, इस बयान के बाद उन्हें फींच दिया गया.

कहने वाले तो ये भी कह रहे हैं कि निर्मला सीतारमन JNU को बदनाम करने के लिए ऐसे बयान दे रही हैं.