पूर्व वर्ल्ड चैंपियन वेटलिफ़्टर, साइख़ोम मीराबाई चानू ने 6ठें क़तर इंटरनेशनल कप में, 49 किलो भारवर्ग में स्वर्ण पदक जीत लिया है. जानकारी के अनुसार, इस ओलंपिक क्वालिफ़ाइंग इवेंट में चानू ने 194 किलोग्राम का एफ़र्ट लगाया. इससे उन्हें टोक्यो 2020 ओलंपिक के फ़ाइनल रैंकिंग में फ़ायदा मिलेगा.


चानू का पर्सनल बेस्ट, 201 किलोग्राम है. चानू ने स्नैच, क्लीन एंड जर्क दोनों ही कैटगरीज़ में एक क्लीन लिफ़्ट ही कर पाईं.

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8 अगस्त 1994 को मणिपुर के एक छोटे से गांव में जन्मी और पली बढ़ी चानू बचपन से ही काफ़ी तेज़ थीं. मीरा ने बचपन में राज्य की वेटलिफ़्टर कुंजुरानी देवी को देखा और ख़ुद को उनसे बेहद प्रभावी पाया. ये वो दौर था जब कुंजुरानी देवी स्टार थीं और एथेंस ओलंपिक में खेलने गई थीं.


बस इसके बाद घर की सबसे छोटी मीरा ने वेटलिफ़्टर बनने की ठान ली. बीबीसी एक रिपोर्ट के अनुसार मीरा की ज़िद के आगे मां-बाप को भी हार माननी पड़ी. 2007 में जब प्रैक्टिस शुरु की तो पहले-पहल उनके पास लोहे का बार नहीं था तो वो बांस से ही प्रैक्टिस किया करती थीं.

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11 साल में वो अंडर-15 चैंपियन बन गई थीं और 17 साल में जूनियर चैंपियन. जिस कुंजुरानी को देखकर मीरा के मन में चैंपियन बनने का सपना जागा था, अपनी उसी आइडल के 12 साल पुराने राष्ट्रीय रिकॉर्ड को मीरा ने 2016 में तोड़ा- 192 किलोग्राम वज़न उठाकर.


मीरा अपने इस चुने हुए रास्ते पर आगे बढ़ती जा रही हैं और उनका अगला पड़ाव टोक्यो ओलंपिक है.