कोरोना वायरस के केस दिन-प्रतिदिन बढ़ते ही जा रहे हैं. ऐसे में कोरोना और दूसरी बीमारियों के मरीज़ों को एंबुलेंस मिलना मुश्किल हो गया है. मुंबई के हालात तो बहुत बुरे हैं. वहां आम बीमारियों से पीड़ित लोगों को एंबुलेंस के लिए घंटों इंतज़ार करना पड़ रहा है. इस समस्या को देखते हुए मुंबई के एक कॉन्स्टेबल ने एक फ़्री एंबुलेंस की शुरूआत की है. इसके ज़रिये वो कोरोना और दूसरी बीमारियों से पीड़ित लोगों को अस्पताल पहुंचा रहे हैं.

मुंबई के कफ परेड पुलिस स्टेशन में तैनात कॉन्स्टेबल तेजस सोनावड़े ये नेक काम कर रहे हैं. उन्होंने कुछ दिनों पहले ड्यूटी के दौरान कुछ लोगों को एंबुलेंस के लिए रोड पर काफ़ी समय से वेट करते हुए देखा था. उन्हें अस्पताल पहुंचाने के बाद सोनावड़े को एंबुलेंस चलाने का ख़्याल मन में आया.

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इसके लिए उन्होंने अपनी दोस्त की एक पुरानी ओमनी कार को एंबुलेंस में तब्दील कर दिया है. इसे वो अपने पुलिस स्टेशन के बाहर ही खड़ी रखते हैं. उन्होंने अपना नंबर एंबुलेंस और आस-पास के इलाकों में बांट दिया है. जब भी किसी को ज़रूरत होती है वो उन्हें कॉल करते हैं और वो तुरंत ज़रूरतमंदों को अस्पताल पहुंचाते हैं. इसमें उनके उच्च अधिकारी भी उनकी सहायता कर रहे हैं.

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जैसे ही कॉल आता है वो उन्हें जाने की अनुमति दे देते हैं. सोनावड़े का एक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया है. इस वीडियो में वो बिना किसी पीपीई किट के बस एक रेन कोट पहन कर मरीज़ों को अस्पताल पहुंचाते दिख रहे हैं.

उन्होंने इस बारे में बात करते हुए कहा- 'मुझे इंफ़ेक्शन होने का डर नहीं है. मैं बस लोगों को अस्पताल तक ठीक समय पर पहुंचाना चाहता हूं. इसके लिए मैं हर बार अपनी एंबुलेंस को सैनेटाइज़ भी करता हूं.'

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सोनावड़े साल 2007 में मुंबई आए थे. वो उनकी दो बेटियां हैं. पत्नी और बच्चों को उन्होंने फ़िलहाल अपने घर नंदूरबार भेज दिया है. वो यहां अकेले रह कर अपनी ड्यूटी के साथ ही लोगों की मदद भी कर रहे हैं. 

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सोनावड़े जी की जितनी तारीफ़ की जाए कम है. मगर हम ये भी चाहेंगे कि वो अपनी सेफ़्टी का भी ख़्याल रखें. हम नहीं चाहते कि ऐसे बहादुर सिपाही को कुछ हो.
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