पुलवामा हमले के बाद जहां कुछ लोग धर्म के नाम पर लोगों को बांटने में जुटे हैं, वहीं दूसरी तरफ़ कश्मीर से अमन और भाईचारे की ख़बर आई है. यहां पर कुछ मुस्लिम घाटी के 80 साल पुराने शिव मंदिर को पुनर्जीवित कर रहे हैं. वो चाहते हैं कि कश्मीर में एक बार फिर से कश्मीरी पंड़ितों की वापसी हो और सभी पहले की तरह ही एक साथ रह सकें.

पुलवामा के Acchan गांव स्थित ये शिव मंदिर वर्ष 1990 के समय से ही विरान पड़ा था. जब कश्मीर में आतंकवाद के चलते वहां से कश्मीरी पंडित पलायन कर गए थे. मगर इतने सालों बाद एक मुस्लिम कम्यूनिटी और एक कश्मीरी पंडित के प्रयासों से इसे फिर से बनाया जा रहा है.

ये मंदिर सीआरपीएफ़ के काफ़िले पर हुए हमले वाली जगह से करीब 12 किलोमीटर दूर है. मंदिर के प्रांगण और गर्भ ग्रह को फिर से बनाया जा रहा है. वैसे तो इनकी योजना इस शिवरात्रि को मंदिर में शिव की प्रतिमा स्थापित कर, इसे फिर से शुरू करने की थी लेकिन भारत-पाक के बीच चल रहे तनाव के चलते कुछ दिनों के लिए इसका काम रोक दिया गया था.

Muslim Auqaf ट्रस्ट के साथ मिलकर इस मंदिर के निर्माण में लगे एक मात्र कश्मीरी पंडित हैं भूषण लाल.

उन्होंने न्यूज़18 से बात करते हुए कहा, '1990 में यहां करीब 40 कश्मीरी पंडितों के परिवार रहते थे. हम चाहते हैं कि वो फिर से यहां वापस लौट आएं. हम बहुत जल्द ही लोगों को यहां पर पूजा करने के लिए निमंत्रण भेजने वाले हैं. हमारा उद्देश है कि एक बार फिर से यहां लोग एक साथ दुआ और पूजा करते दिखाई दें.'

फ़िलहाल मंदिर को बनाने का काम ज़ोरों पर है. उम्मीद है कि जल्द ही वो दिन आएगा, जब सुबह-सुबह एक साथ अज़ान और भजन सुनाई देंगे.