कहते हैं बुराई कितनी भी बड़ी क्यों न हो जाए, अच्छाई के सामने छोटी ही रहती है. नफ़रतों की बिसात लाख बिछा दो मगर जीतता प्यार ही है. ये बातें वैसे फ़िल्मी और किताबी लगती हैं. लेकिन जनाब हम भूल जाते हैं कि ये फिल्मी और किताबी बातें भी तो हम इंसान ही लिखते हैं. इस बात का एहसास हमें दिल्ली के ये लोग दिलाते हैं.

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दिल्ली जो आज जल रही है. नफ़रतों की तलवारों हैवानियत की जंग लड़ी जा रही है. मज़हबी पागलपन सड़कों पर नंगा नाच कर रहा है. इन सबके बीच मर रहा है तो इंसान और उसकी इंसानियत. ऐसे में कुछ लोग हैं जिन्होंने इंसानियत को सहारा दे रखा है. जी हां. इंसानियत को.

Firstpost की रिपोर्ट के मुताबिक़, मुस्तफाबाद में एक शख़्स सड़कों पर टहलकर आवाजें लगा रहा है ‘अंदर रहो, महफ़ूज रहो सब.’ जब उससे पूछा गया कि वो ऐसा क्यों कर रहा है? तो उसने जवाब दिया कि पुलिस को देखते ही लोगों को गोली मार देने के निर्देश मिले हैं, ऐसे में हम नहीं चाहते कि पुलिस हमारे इलाके में किसी व्यक्ति को गोली मारे.’

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जिस धार्मिक उत्पात का दिल्ली शिकार हो रही है, उसे भी मुस्तफ़ाबाद के लोगों ने मात दे दी. इलाके के हालात बयां करते हुए एक शख़्स ने एक घर की ओर इशारा करते हुए कहा कि ‘देखिये उस घर में एक ब्राम्हण लड़की पिछले तीन दिनों से रुकी हुई है, वो एक मुसलमान का घर है.’

घर के अंदर जाकर पता किया गया तो वाकई सोनिया स्वामी नाम की एक लड़की मोहम्मद अरशद ख़ान के घर पर पिछले दो दिनों से रुकी हुई थी. सोनिया ने बताया कि ‘जब हालात ख़राब होने शुरू हुए तब वो अपने कॉलेज में थी. उसकी क्लासमेट और दोस्त शमा मलिक ने उसे अपने घर चलने के लिए कहा क्योंकि वहां से सबसे नज़दीक और सुरक्षित जगह वो ही थी.’

वहीं, शमा ने बताया कि ‘उसकी दोस्त सोनिया शिव विहार में रहती है. वहां हालात पूरी तरह खराब हो चुके थे. ऐसे में मैं नहीं चाहती थी, उसे किसी तरह का नुक़सान हो. इसिलए मैं उसे अपने साथ घर ले आई.’

सोनिया ने कहा कि ‘मेरा परिवार पहले काफी डरा हुआ था, लेकिन अब जबकि उन्हें पता चला कि मैं शमा के घर पर हूं तो वे निश्चिंत हैं.’

ये कोई एकलौता मामला नहीं है, जहां लोगों ने आगे बढ़कर किसी का साथ दिया हो. यहां से महज़ आधा किमी की दूरी पर लेन नंबर 15 पर तीन हिंदू परिवारों के मकान हैं. पेशे से ड्राइवर मोहम्मद इमरान ने बताया कि, ‘इलाके़ में दंगे जैसे हालात होने के बाद ये लोग बहुत डर गए थे. हमने कहा इनसे, तुम लोगों को बिल्कुल भी डरने की ज़रूरत नहीं है. हम तुम्हारे साथ हैं. तुम लोग हमारी जिम्मेदारी हो, हमारे पड़ोसी हो. हम तुम्हारा ख़याल रखेंगे.’ साथ ही उसने बताया कि इन हिंदू परिवारों में एक मोनू नाम का आदमी उसका 35 सालों से बहुत अच्छा दोस्त है.

वहीं, मोनू ने बताया कि जिस तरह के हालात थे, उसे देखकर हम लोग बहुत डर गए थे. लेकिन हमारे पड़ोसियों ने हमें बहुत हिम्मत थी. एक वो लोग हैं जो पत्थरबाज़ी कर रहे, हिंसा कर रहे हैं. वहीं ऐसे भी लोग हैं जो इस मुश्क़िल समय में हमारी अलग पहचान होने के बाद भी मदद कर रहे हैं.

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मरीज़ों की मदद करने के लिए मुस्तफ़ाबाद इलाके में टीम बनाने वाले एम्स के डॉक्टर हरजीत भाटी के मुताबिक, हिंसा भड़कने के बाद श्याम विहार इलाके में करीब 25 मुस्लिम परिवारों ने हिंदुओं के घरों में शरण ले रखी थी, जबतक बुधवार को पुलिस उन्हें आकर मुस्तफ़ाबाद अस्पताल नहीं ले गई. इन्हीं परिवारों में से एक सदस्य ने बताया कि, ‘हम ज़िंदा है क्योंकि हमारे हिंदू पड़ोसियों ने हमें आरएसएस के गुंडों से बचाया. सब जानते हैं कि इन दंगो के पीछे किसका हाथ है. मुझे मेरे भारत पर गर्व है जो दशकों से बीजेपी/आरएसएस के चेहरे पर थप्पड़ जड़ रहा है.’

बता दें, मुस्तफ़ाबाद इलाका मुस्लिम बाहुल्य इलाका है. लेकिन भजनपुरा, भागीरथी और गोकुलपुरी जैसे हिंदू बाहुल्य इलाकों से घिरा हुआ है. तमाम हिंसा के बावजूद मुस्तफ़ाबाद इलाके में ऐसी बहुत से कहानियां दोनों ही तरफ से हैं, जहां हैवानियत को इंसानियत ने मुंहतोड़ जवाब दिया.