इस दुनिया के रिश्ते प्यार, सम्मान और जज़्बात से नहीं बल्क़ि महज़ मतलब के धागे से पिरोए गए हैं. यही वजह है कि जब एहसान ज़्यादा हो जाता है, तो ये कमज़ोर धागा उसको संभाल नहीं पाता. ये टूटता इस कदर है कि बीच में सिर्फ़ और सिर्फ़ नफ़रत के उधड़े रेशे ही नज़र आते हैं. यकीन नहीं हो रहा तो ये ख़बर पढ़ लीजिए.

Indianexpress की रिपोर्ट के मुताबिक़, नासिक सिविल अस्पताल में E&T सर्जन डॉ संजय गांगुर्डे कुछ दिनों पहले जब अस्पताल से कोरोना संक्रमितों का इलाज कर घर लौटे तो उनके पड़ोसियों ने उनका कोरोना वॉरियर्स की तरह तालियों की गड़गड़ाहट के साथ स्वागत किया था. लेकिन अब जब दूसरे को बचाते-बचाते वो ख़ुद संक्रमित हो गए तो उनके पड़ोसियों ने उन्हें बिल्डिंग में घुसने तक नहीं दिया.

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दरअसल, डॉ गांगुर्डे में मंगलवार को कोरोना संक्रमण के लक्षण दिखने के बाद डॉक्टर ने उन्हें घर में ही आइसोलेशन में रहने की सलाह दी थी. लेकिन इसके पहले कि वो घर पहुंचते वॉट्सएप पर ये मेसेज फैल गया कि नासिक के गंगापुर रोड में रहने वाले एक सिविल अस्पताल के डॉक्टर की रिपोर्ट कोरोना पॉज़िटिव पाई गई है.

डॉक्टर गंगापुर रोड, रुशराज हाय-उदय सोसायटी में रहते हैं. स्वास्थ्य मंत्रालय के निर्देशों के अनुसार हल्के लक्षण दिखने पर अपने ही घर में अलग रहने की सलाह दी गई है. लेकिन उनकी सोसाइटी समिति के सदस्यों ने आपस में बात कर उनकी एंट्री पर रोक लगा दी. डॉ. गांगुर्डे ने बताया कि उन्हें सोसाइटी की तरफ़ से एक कॉल आया कि वो घर वापस नहीं आएं. हालाकिं, जब वो इसके बाद भी मंगलवार को गए तो उन्हें सोसाइटी के अंदर दाख़िल तक नहीं होने दिया गया.

जब इस मामले पर समिति सदस्यों से संपर्क करने की कोशिश की गई तो उन लोगों ने किसी भी तरह की टिप्पणी करने से इनकार कर दिया. जबकि अन्य लोगों ने कॉल का कोई जवाब नहीं दिया.

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डॉक्टर ने कहा कि उनके पास नासिक सिविल अस्पताल में रहने के अलावा कोई विकल्प नहीं है. ये सिविल अस्पताल 100 बेड वाला COVID-19 उपचार केंद्र है. डॉ. गांगुर्दे ने बताया कि उन्हें एक स्टोर रूम में रहना पड़ रहा है. जबकि उनकी पत्नी जो तहसीलदार हैं, वो बगल के कमरे में है, वो अपनी रिपोर्ट का इंतज़ार कर रही हैं. उन लोगों के खाने-पीने का इंतजाम उनके दोस्त कर रहें हैं.

उन्होंने बताया कि, ‘मैं सभी डॉक्टरों को मास्क और सैनिटाइटर वितरित करता था. ख़ुद को अलग करने और देखभाल करने के लिए यहां कुछ सुविधाएं नहीं है. इस मामले में न तो अस्पताल प्रशासन, नगर निगम और न ही पुलिस हस्तक्षेप करने को तैयार है. मेरी पत्नी बेहद परेशान है.’

हालांकि, इस मामले पर जिला सिविल सर्जन डॉ. सुरेश जगदाले ने कहा कि वो क्वारंटीन में नहीं है बल्कि एक कोविड सेंटर में हैं. उन्हें स्टोर रूम में नहीं बल्क़ि एक स्पेशल रूम में रखा गया है. मैं मानता हूं कि वहां घर जैसी सुविधाएं नहीं है. हम उन लोगों की पूरी देखभाल कर रहे हैं. इस अस्पताल के दो अन्य डॉक्टरों की रिपोर्ट भी पॉजिटिव आई है.