भारत सरकार 'बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ' अभियान चला रही है. लेकिन लगता है उत्तराखंड के लोग इसे लेकर सीरियस नहीं हैं. क्योंकि वहां के उत्तरकाशी ज़िले के 132 गांवों में पिछले तीन महीने से एक भी लड़की पैदा नहीं हुई है. इसका ख़ुलासा होने के बाद से ही ज़िला प्रशासन ने इस घटना के जांच के आदेश दे दिए हैं.

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राज्य के स्वास्थ विभाग द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार, उत्तरकाशी में पिछले 3 महीने के दौरान 132 गांव में करीब 216 बच्चों ने जन्म लिया है. ये सभी बच्चे लड़के हैं. इनमें कोई भी लड़की नहीं है. अधिकारियों को शक़ है कि इसका कारण कन्या भ्रूण हत्या करना हो सकता है.

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बिगड़ते लिंगानुपात की ये स्थिति सामने आने के बाद ज़िला अधिकारी आशीष चौहान ने इसके जांच के आदेश दिए हैं. उन्होंने टाइम्स ऑफ़ इंडिया से बात करते हुए कहा-’स्थिति संदिग्ध है और इसने ज़िले में हो रही कन्या भ्रूण हत्या के अपराध को उजागर किया है. हम अगले 6 महीने तक इन सभी गांवों पर नज़र रखेंगे. वहां की आशा(नर्स) से मिलें आंकड़ों का अध्ययन करेंगे और सुधार न होने पर दोषियों पर क़ानूनी कर्रवाई करेंगे.’

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आपकी जानकारी के लिए बता दें कि लिंगानुपात में उत्तराखंड पूरे देश में 9वें स्थान पर है. 2011 की जणगणना के अनुसार, यहां पर 1000 पुरुषों पर 963 महिलाएं मौजूद हैं. उत्तरकाशी की स्थिति तो और भी ख़राब है. यहां पर प्रति हज़ार पुरुषों पर 958 महिलाएं ही हैं.

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आज से 100 साल पहले ज़िले का लिंग अनुपात महिलाओं के अनुकूल था. 1901 में यहां पर प्रति 1000 पुरुषों पर 1015 महिलाएं रहती थीं. लेकिन साल 1931 से ही इसमें गिरवाट दर्ज की जाने लगी थी.

उत्तरकाशी का ये मामला गवाह है कि सरकार के बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान को वहां के लोगों पर कोई असर नहीं हुआ.