कोरोना वायरस के चलते पिछले 7 महीनों से देशभर के स्कूल कॉलेज बंद हैं. ऐसे में छात्रों को ऑनलाइन पढ़ाई करनी पड़ रही है. जिन छात्रों के पास मोबाइल, लैपटॉप और इंटरनेट की सुविधा है वो तो आसानी से पढ़ाई कर पा रहे हैं, लेकिन जिनके पास ये साधन नहीं हैं वो छात्र बेहद परेशान हैं.  

दिल्ली के जाने माने 'लेडी श्रीराम कॉलेज' की एक छात्रा ने लैपटॉप नहीं होने के चलते पढ़ाई में हो रही परेशानी की वजह से ख़ुदकुशी कर ली है. 

दरअसल, तेलंगाना की रहने वाली 19 वर्षीय ऐश्‍वर्या रेड्डी ने कॉलेज की अपनी क्‍लास को जारी रखने के लिए परिवार से एक लैपटॉप (चाहे सेकंड हैंड ही क्यों न हो) का इंतजाम करने की मांग की थी, लेकिन जब परिवार के लोग ऐसा करने में असफ़ल रहे तो ऐश्‍वर्या ने ये बड़ा कदम उठाने पर मजबूर हुईं.  

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बताया जा रहा है कि दिल्ली के 'लेडी श्रीराम कॉलेज' से मैथ्‍स ऑनर्स की पढ़ाई कर रही ऐश्‍वर्या फ़रवरी में स्‍कूल-कॉलेज बंद किए जाने के बाद घर लौट गई थी. अक्‍टूबर में उसने पिता से ये कहते हुए लैपटॉप का इंतजाम करने का आग्रह किया था कि मोबाइल फ़ोन में ऑनलाइन क्‍लास अटेंड करना बहुत मुश्किल हो रहा है. क़रीब 1 महीने तक पिता से लैपटॉप का जुगाड़ न हो पाया तो ऐश्वर्या 3 नवंबर को ख़ुदकुशी कर ली.  

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इस दौरान ऐश्‍वर्या ने तेलुगु भाषा में एक सुसाइड नोट भी छोड़ा है. इसमें इन्होने लिखा 'मेरे कारण परिवार को बहुत ख़र्च उठाने पड़ रहे हैं. मैं उन पर बोझ हूं, मेरी पढ़ाई बोझ बन गई है. यदि मैं पढ़ नहीं सकती तो जीवित भी नहीं रह सकती. कृपया ये सुनिश्चित करने का प्रयास करें कि INSPIRE स्‍कॉलरशिप कम से कम 1 साल के लिए दी जाए'.

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ऐश्‍वर्या के पिता जी. श्रीनिवास मोटसाइकिल मैकेनिक हैं. ऐश्‍वर्या ने 12वीं में 98.5 प्रतिशत अंक हासिल किए थे. इसलिए पिता ने उसके कॉलेज एडिमशन के लिए एक बेडरूम का घर तक गिरवी रख दिया था. इसके बाद किसी तरह से पैसों का इंतजाम करके बेटी को पढ़ाई के लिए दिल्ली के बेस्ट कॉलेज में भेजा था.

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ऐश्वर्या की मां सुमथि रेड्डी कहती हैं, 'मेरी बेटी काफ़ी प्रतिभावान थी, हमारे परिवार को उस पर नाज था, लेकिन वो जिस हालात से गुजरी, वैसा किसी की भी बेटी के साथ नहीं होना चाहिए. हमारी आर्थिक स्थिति के कारण वो मानसिक तनाव से गुजर रही थी. हमें को इस बात का अहसास ही नहींहो रहा है कि वो अब हमारे बीच नहीं है.

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ऐश्वर्या के पिता श्रीनिवास रेड्डी ने बताया कि, मार्च में ऐश्वर्या को 1.2 लाख रुपये की स्‍कॉलरशिप मिलनी थी, लेकिन इसमें देर हो गई. INSPIRE स्‍कॉलरशिप, विज्ञान और तकनीकी मंत्रालय की ओर से प्रदान की जाती है. वो सिविल सर्विसेस के एक्‍जाम भी देना चाहती थी, लेकिन उसे चिंता सता रही थी कि हम उसकी पढ़ाई का खर्च वहन नहीं कर पाएंगे.

'स्‍टूडेंट फ़डरेशन ऑफ़ इंडिया' का कहना है कि, स्‍कॉलरशिप में हुई देर केंद्र सरकार की लापरवाही को दर्शाता है. अगर समय पर पैसे मिल गए होते तो होनहार छात्रा ऐश्वर्या आज हमारे बीच होतीं.