उत्तर प्रदेश के कन्नौज के एक सरकारी अस्पताल में डॉक्टरों की संवेदनहीनता मासूम की ज़िंदगी पर भारी पड़ गई. एक पिता अस्पताल परिसर की फ़र्श पर अपने एक साल के बच्चे के शव को चिपकाए रोता-बिलखता रहा. जिस बच्चे को कभी सीने से लगाकर उसे गर्माहट महसूस होती थी, उस बच्चे का शरीर आज ठंडा पड़ चुका था. जिन नन्हीं मुट्ठियों में कभी उस पिता ने पूरा संसार भरने की ख़्वाहिश रखी थी, आज वो उन्हीं में हलचल तलाशता रहा, लेकिन सब ख़त्म हो चुका था. 

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दरअसल, प्रेमचंद का बेटा अनुज कई दिन से बुख़ार से पीड़ित था, वो उसे लेकर अस्पताल पहुंचे. आरोप है कि डॉक्टरों ने उनके बेटे को छूने तक से इनकार कर दिया. डॉक्टरों ने उन्हें अपने बच्चे को लगभग 90 किलोमीटर दूर कानपुर ले जाने के लिए कहा, जहां बड़ा सरकारी अस्पताल है. 

बच्चे की हालत ऐसी नहीं थी कि उसे इतनी दूर अस्पताल में ले जाया जा सके. तुरंत इलाज करना ज़रूरी था, लेकिन आरोप है कि डॉक्टर उसे देखने को तैयार ही नहीं थे. हालांकि, काफ़ी मिन्नतों के बाद बच्चे को इमरजेंसी वार्ड में एडमिट किया गया, लेकिन तब तक काफ़ी देर हो चुकी थी. मासूम ने इस व्यवस्था के आगे दम तोड़ दिया. 

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बच्चे की मौत की ख़बर पाते ही प्रेमचंद टूट गए. बच्चे के शव को लेकर ज़मीन पर गिर गए. उसे पकड़कर रोने लगे. पास में बैठी मां आशा देवी का भी का रो-रोकर बुरा हाल हो गया. वो बच्चा जिसे वो डरकर घर की देहरी पार नहीं करने देती थीं, आज वो इस दुनिया को ही छोड़कर ही चला गया. दिल को झकझोर देने वाली इस घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. 

पिता ने बताया, ‘बच्चे को केवल एक बार ही चेक किया वो भी तब जब कुछ लोगों ने अपने फ़ोन पर फ़िल्म बनाना शुरू किया. इससे पहले कोई भी डॉक्टर मेरे बच्चे को छूने के लिए तैयार नहीं था. हम 30 मिनट तक वहां रहे. वे लगातार उसे कानपुर ले जाने के लिए कहते रहे. मैं एक ग़रीब व्यक्ति हूं. मेरे पास पैसा नहीं है. मैं क्या कर सकता था.’ 

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वहीं, मां ने कहा, ‘उसकी गर्दन सूज गई थी. वे हमें 30-40 मिनट तक इंतजार कराते रहे. उसके बाद बच्चे को एडमिट किया गया लेकिन उसकी मौत हो गई.’ 

ज़िले के डॉक्टर्स और अधिकारियों ने किसी भी लापरवाही से इनकार किया है. कन्नौज के शीर्ष सरकारी अधिकारी राजेश कुमार मिश्रा ने मीडिया को बताया, ‘कल शाम 4.15 बजे बच्चे को अस्पताल लाया गया था. बच्चे को आपातकालीन वार्ड में भर्ती कराया गया. मामला बहुत गंभीर था, एक शिशु विशेषज्ञ को आपातकालीन वार्ड में बुलाया गया लेकिन 30 मिनट के भीतर उसकी मौत हो गई. डॉक्टरों का कहना है कि उन्होंने पूरी कोशिश की मगर बच्चे को बचाया नहीं जा सका.’