बीते मंगलवार को पतंजलि सीईओ आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि उन्होंने ये क्लेम कभी नहीं किया कि कोरोनिल से कोविड-19 का इलाज हो सकता है.


मीडिया से बात करते हुए आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि पतंजलि द्वारा बनाई गई दवाई के ख़िलाफ़ भ्रम फैलाया जा रहा है.  

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आचार्य बालकृष्ण ने ये कहा कि उनके द्वारा बनाई गई दवाइयों के क्लिनिकल रिसर्च के दौरान, कोरोना के रोगी ठीक हुए. उन्होंने यही बात देश को बताई.


एक रिपोर्ट के अनुसार, कुछ दिनों पहले ही योग गुरू बाबा रामदेव, आचार्य बालकृष्ण, एनआईएमएस यूनिवर्सिटी के डायरेक्टर डॉ. बलबीर सिंह तोमर और जयपुर के ही कुछ अन्य लोगों पर FIR हुई थी. इन लोगों ने क्लेम किया था कि उन्होंने कोविड-19 की दवाई बना ली है. इस ख़बर के बाद देशभर में तहलका मच गया था.   

कुछ लोग बाबा की तारीफ़ों के पुल बना रहे थे और कुछ लोग प्रश्न उठा रहे थे.  

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पिछले हफ़्ते आयुष मंत्रालय ने भी मामले पर संज्ञान लिया और पतंजलि से विज्ञापन और पब्लिसिटी बंद करने को कहा. उत्तराखंड आयुर्वेद डिपार्टमेंट ने भी सफ़ाई दी कि उन्होंने इम्युनिटी बूस्टर का लाइसेंस दिया था, 'वायरस की दवाई' का नहीं.  


एक रिपोर्ट के मुताबिक़, बीते 23 जून को पतंजलि योगपीठ, हरिद्वार में बाबा रामदेव ने कहा था, 
'हमने आयुर्वेदिक-क्लिनिकली कन्ट्रोल्ड, रिसर्च, सुबूत और ट्रायल के बाद कोविड-19 की दवाई बनाई है. हमने क्लिनिकल केस स्टडी की, क्लिनिकल कन्ट्रोल्ड ट्रायल किया और पाया कि 69% मरीज़ 3 दिन में ठीक हो गये जबकी 100% मरीज़ 7 दिन में ठीक हो गये.' 

दुनिया में अभी तक कोविड-19 की कोई दवाई या वैक्सीन नहीं बनी है.