भारतीय फ़ौज को दुनिया भर में इज़्ज़त की नज़रों से इसलिए देखा जाता है क्योंकि ये सेना के कड़े नियमों का पालन करते हुए विषम से भी विषम परिस्थितियों में काम करना जानती है.


एक फ़ौजी का काम आसान नहीं होता, अफ़सोस भारतीय फ़ौज और फ़ौजियों की इस मेहनत का इस्तेमाल कई दफ़ा राजनीति के लिए किया जाता है. राजनीतिक पार्टी अपनी कमियां छुपाने के लिए सेना का इस्तेमाल राष्ट्रभक्ति के मुद्दे में लपेट कर करती हैं. जिस वजह से हाल-फ़िलहाल में ये विवाद का मुद्दा बना है.

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हाल ही में शेयर की जा रही ये फ़ोटो BSF जवानों की है. इस तस्वीर में ये जवान एक टेंट में रेस्ट कर रहे हैं. 5-6 लोगों की जगह लायक इस टेंट में लगभग 15 जवान अपने बस्तों के साथ जैसे-तैसे लेटे हुए हैं.


तस्वीर शेयर वक़्त अधिकतर लोगों का ये कहना था, 'हम कितनी आरामपसंद ज़िन्दगी जी रहे हैं और ये देखिये हमारे जवानों को, जिन्हें आराम करने को भी मिलता है, तो ऐसे!'

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मेरा मानना है कि कई लोग 'Salute/ सलाम/ जय हिंद' लिख कर भी ये फ़ोटो शेयर कर रहे होंगे. और ऐसा करते ही हम सबसे बड़ी भूल करते हैं. देश के जवानों को शत्-शत् नमन करते हुए हम ये भूल जाते हैं कि यहां सरकार और प्रशासन से उनके लिए सुविधाओं की कमी से जुड़े सवाल पूछे जाने चाहिए. ऐसा क्यों है कि अपनी जान पर खेल कर देश के बॉर्डर की सुरक्षा कर रहे सैनिकों को इतनी लचर सुविधाएं दी जा रही हैं?

कई लोगों ने ट्विटर पर इससे जुड़े सवाल पर भी उठाये:

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एक जवान को उसकी ड्यूटी और उसके धर्म के बदले में जितनी इज़्ज़त मिलनी चाहिए, उतनी ही सुविधाएं भी. आप सिर्फ़ राष्ट्रभक्ति का चोगा अपने राजनीतिक या निजी फ़ायदे के लिए नहीं पहन सकते. अगर आप एक फ़ौजी को इज़्ज़त देना चाहते हैं, तो सबसे पहले उसको मिलने वाली सुविधाओं को ठीक करें.