6 मार्च को लखनऊ के डालीगंज चौराहे पर दो लोगों ने दो कश्मीरी युवकों को पीटा था. उसका वीडियो इंटरने से लेकर सोशल मीडिया और मीडिया के तमाम माध्यमों पर वायरल हो गया था. इस वीडियो में ख़ुद को विश्व हिन्दू दल का बताने वाले 2 शख़्स ड्राई फ़्रूट्स बेचने वाले दो कश्मीरी युवकों को इसलिए पीट रहे थे, क्योंकि कश्मीर में भारतीय सेना पर कश्मीरी पत्थर फेंकते हैं. कथित तौर पर वो उसी का बदला इन्हें पीटकर ले रहे थे.

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इस मारपीट को कुछ देर लोगों ने देखा पर कोई जल्दी उन्हें बचाने नहीं आया. वहीं से गुज़र रहे जफ़र रिज़वी नाम के एक भले आदमी ने उन कश्मीरी युवकों को बचाकर इंसानियत की मिसाल पेश की थी. उनका एक वीडियो भी है, जिसमें वो अगर किसी से दिक्कत है तो पुलिस में शिकायत करने की बात कर, इस तरह से सरेआम मारपीट करने को ग़लत बता रहे हैं.

ख़ैर, मामले को तूल पकड़ता देख यूपी पुलिस भी हरकत में आई और उसने आरोपियों में से एक शख़्स, बजरंग सोनकर को गिरफ़्तार कर लिया. लेकिन जब तक पुलिस ने अपनी मुस्तैदी दिखाई तब तक किसी के दिल पर कभी न भरने वाला ज़ख्म लग चुका था.

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वहीं, तहजीब के शहर लखनऊ एक बार फिर अपनी गंगा-जमुनी सभ्यता को कायम करता दिखाई दिया. वहां जिस कश्मीरी युवक से पिटाई की गई थी, उसकी मदद के लिए All India Democratic Women’s Association (AIDWA) के लोगों ने अपील की.

इसके लिए उन्होंने लखनऊ वालों से आग्रह किया कि वो डालीगंज पर उसी जगह पर आएं और उस कश्मीरी से ड्राई फ्रूट्स ख़रीद कर उसकी आर्थिक सहायता करें. ऐसा इसलिए किया गया ताकि उस कश्मीरी युवक का यहां के नागरिकों पर भरोसा फिर से कायम हो सके. और वो किसी भी तरह ख़ुद को अकेला न समझे.

मगर जिस पर बीतती है, वो उसे कभी नहीं भूलता. यही बात कश्मीरी युवक ने भी कही. न्यूज़ 18 को दिए अपने एक इंटरव्यू में उसने बताया कि उसका नाम अब्दुल सलाम है. वो पिछले दो दशकों से लखनऊ में सूखे मेवे बेचने का काम कर रहा है. लेकिन ऐसा पहले कभी नहीं हुआ.

अब्दुल के तीन बच्चे हैं. वो हर साल 3-5 महीनों के लिए लखनऊ आता है और ड्राई फ्रूट्स बेचकर पैसे कमा कर घर भेजता है. लेकिन जब से उसके साथ ये मारपीट वाली घटना हुई है, उसके घरवाले भी परेशान हैं. उन्हें दिन-रात उसकी चिंता सताती रहती है.

अब्दुल ने कहा- मेरे दाईं तरफ के हिस्से में अभी भी दर्द होता है. वक़्त के साथ ये दर्द तो दूर हो जाएगा, लेकिन जो इस घटना के बाद जो मुझे मानसिक शोषण हुआ है, उसे मैं शायद कभी नहीं भूला पाऊंगा.

कुछ लोग अपनी राजनीति को चमकाने के चक्कर में ये भी भूल जाते हैं कि, जो वो कर रहे हैं सही है या ग़लत. ऐसे लोगों देश के सौहार्दपूर्ण माहौल को बिगाड़ना चाहते हैं. इन्हें पहचानकर हमें सबक सिखाना ही होगा. जब तक ऐसे लोग रहेंगे तब देश न तो कश्मीरी और न ही आम भारतीय नागरिक एक दूसरे को अच्छे से समझ पाएंगे.