हां, ऐसा ही लगता है. दिल और टीवी जब एक साथ टूटे तब ऐसा ही लगता है. बहुत उम्मीदें लपेटे आज पौने दस बजे उठ गए थे न? क्या सोचे थे... हमारे एकलौते प्रधानमंत्री नरेंद्र दामोदरदास मोदी (टाइम बहुत है, इसलिए पूरा नाम लो) आएंगे और लॉकडाउन ख़त्म कर देंगे.

लो. हो गवा ख़त्म. अब 3 मई तक बावर्ची बनो या शक़्तिमान किसी को घंटा फ़र्क नहीं पड़ता. अरे...अरे...अरे... गुस्साओ नहीं. तुम्हारे जले पर नमक छिड़कने थोड़े ही आए हैं. हम सोचे मूड ख़राब होगा दोस्त लोगन का तो लाओ कुछ बढ़िया परोस दें.

तो साहिबान, मेहरबान, कदरदान पेश कर रियां हूं आपके सामने दुनिया के सबसे टैलेंटेड ख़लिहर लोगों के द्वारा बनाए गए हंसोड़पंती से भरपूर एक से बढ़कर एक चुनिंदा मीम्स.