लगभग तीन सप्ताह पहले पुलिस ने जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय के पुस्तकालय में आंसू गैसे के गोले दागे थे, एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने ये भी कबूल किया है कि पुलिस ने CAA के ख़िलाफ़ प्रदर्शन करने वालों के ऊपर गोली भी चलाई थीं, इस बात से पुलिस शुरू से इंकार करती आ रही थी.

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NDTV और The Indian Express में प्रकाशित रिपोर्ट की पुष्टि करते हए The Hindu से बात करते हुए एक एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने पहचान गुप्त रखने की शर्त पर बताया कि स्पेशल इंवेस्टिगेशन टीम(SIT) हिंसा के सभी घटनाओं की जांच करेगी जिसमें पुलिस द्वारा चलाए गए गोली की भी जांच होगी.

घटना के बाद से पुलिस इस बात से इंकार करती रही थी कि उन्होंने प्रदर्शनकारियों के ऊपर गोलियां नहीं चलाई थी.

सफ़दरजंग अस्पताल में अपना इलाज़ करने पहुंचे एक प्रदर्शनकारी को गोली लगने की बात कही जा रही थी, लेकिन पुलिस तब भी यही दावा कर रही थी कि उनकी तरफ़ से कोई गोली नहीं चली है और यह घाव आंसू गैस के गोले की ही.

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सोशल मीडिया पर अपलोड किए गए एक वीडियो में देखा गया कि तीन पुलिस कर्मचारी पथराव से बचने के लिए दीवार की ओट में छिपे हुए थे, उनमें से दो पुलिस कर्मचारी ने अपने सर्विस पिस्तॉल से भीड़ की ओर तीन गोलियां चलाईं और भाग गए. यह वीडियो 15 दिसंबर को मथुरा रोड पर शूट किए गए थे.

पुलिस आधिकारी का कहना है कि अगर वो गोलियां आत्म रक्षा में चलाई गई थीं तो उसकी अलग से कोई जांच नहीं की जाएगी.

गोली चलाने के घटना के वक़्त एक सीनियर पुलिस अधिकारी भी घटनास्थल पर मौजूद थे, इसकी जानकारी पुलिस डायरी में दर्ज है.