भारत में ज़हरीली हवा ने साल 2019 में जान-माल दोनों को बड़ा नुकसान पहुंचाया है. वायु प्रदूषण के कारण 2017 के मुकाबले साल 2019 में असमय हुई मौतों का आंकड़ा कहीं अधिक है. Lancet Planetary Health में प्रकाशित नए वैज्ञानिक शोध पत्र के अनुसार, साल 2019 में देश में क़रीब 17 लाख लोगों की मौत प्रदूषण की वजह से हुई. इस साल देश में हुई कुल मौतों का ये 18 फीसदी है. वहीं, साल 2017 में ये आंकड़ा 12 लाख 40 हजार (12.5 फीसदी) था.

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यूपी, बिहार की जीडीपी सबसे ज़्यादा प्रभावित

वायु प्रदूषण का असर देश की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ा है. प्रदूषण के चलते असमय मौतों और बीमारियों के कारण 2019 में देश को 2.6 लाख करोड़ रुपये का आर्थिक नुकसान हुआ, जो सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 1.4 प्रतिशत है. वहीं, वायु प्रदूषण के कारण आर्थिक नुकसान उत्तरी और मध्य भारत के राज्यों की जीडीपी में कहीं ज़्यादा है. उत्तर प्रदेश में ये सबसे ज़्यादा (जीडीपी का 2.2 प्रतिशत) और उसके बाद बिहार में (जीडीपी का दो प्रतिशत) है.

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वैज्ञानिक पत्र के मुताबिक, भारत में घरेलू वायु प्रदूषण में कमी आई है, जिससे 1990 से 2019 के बीच मृत्यु दर में 64 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है. जबकि इसी दौरान बाहरी वायू प्रदूषण की वजह से होने वाली मृत्युदर में 115 फ़ीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है.

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नीति आयोग के सदस्य प्रोफ़ेसर विनोद पॉल ने कहा कि वैज्ञानिक पत्र में भारत में वायु प्रदूषण पर नवीनतम साक्ष्य प्रस्तुत करते हैं, जो स्वास्थ्य को होने वाले नुक़सान के आर्थिक प्रभाव को व्यक्त करता है. उन्होंने कहा, वायु प्रदूषण कम करने के लिये भारत ने कई अहम पहल की है.