मंगलवार को पूरे देश ने बड़े धूमधाम से दशहरे का त्यौहार मनाया. दशहरे पर पटाखों के साथ रावण के पुतले जलाए जाते हैं. ज़ाहिर सी बात है कि दशहरे के अगले दिन का प्रदूषण स्तर बढ़ जाएगा. राजधानी दिल्ली में ऐसा हुआ नहीं.

Hindustan Times की एक रिपोर्ट के मुताबिक़, दशहरे के अगले दिन दिल्लीवालों ने पिछले 5 साल में सबसे साफ़ हवा में सांस ली.

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Central Pollution Control Board (CPCB) के डेटा के मुताबिक़, बुधवार को दिल्ली का Air Quality Index (AQI) 173 रिकॉर्ड किया गया जबकि पिछले साल ये 326 था.


प्रदूषण का स्तर इस बात पर भी निर्भर करता है कि दशहरा कब पड़ रहा है. पिछले 5 सालों में 3 बार दशहरा अक्टूबर के शुरुआत में पड़ा. अक्टूबर-नवंबर में तापमना गिरता है और खेतों में पुआल का जलाया जाना बढ़ जाता है.

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Indian Meteorological Department के वैज्ञानिकों का कहना है कि मॉनसून के ज़्यादा दिन तक रुकने की वजह से भी प्रदूषण पिछले सालों की मुक़ाबले कम रहा.


दशहरे के आयोजन करने वालों ने भी और सालों के मुक़ाबले इस बार कम पटाखों का इस्तेमाल किया. सी ब्लॉक, लाजपत नगर- 2 वेलफ़ेयर एसोशिएशन के प्रेसिडेंट योगेश पाहुजा ने कहा,
'बढ़ते प्रदूषण के स्तर को देखते हुए हमने इस बार पटाखे नहीं जलाए.'

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रावण दहन के बजाए इन लोगों ने लेज़र शो का आयोजन किया.


दिल्ली में प्रदूषण के कई कारण हैं. गाड़ी के धुंए, पंजाब-हरियाणा में जलाए जानी वाली फसल, धूल, Construction Sites से उड़ने वाली धूल आदि. सर्दियों में प्रदूषण का स्तर और बढ़ जाता है.