भारत में जातिगत आधार पर भेद-भाव ग़ैरक़ानूनी है. अनुसूचित जाति और जनजातियों की रक्षा के लिए कई क़ानून बनाये गये हैं लेकिन उनके ख़िलाफ़ अपराधों की संख्या में कमी नहीं आई है.  

हर भारतीय को पता है कि जाति व्यवस्था अभी भी देश में व्याप्त है. जाति के आधार पर लोगों के साथ अन्याय होता है. जाति के बाहर शादी करने पर लोगों को मौत के घाट उतार दिया जाता है. तमाम नियम और क़ानून धरे के धरे रह जाते हैं. 

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आज भी शादी के लिए सबसे पहले जाति ही देखी जाती है. 2020 में एक नई बात पता चली है कि खेल-कूद में भी जाति देखी जा रही है. सोशल मीडिया पर एक पोस्टर वायरल हो गया है. इस पोस्टर में ‘ब्राह्मण क्रिकेट टूर्नामेंट’ का विज्ञापन है. 

News18 की रिपोर्ट के अनुसार, इस साल इस टूर्नामेंट का आयोजन हैदराबाद में 25 से 26 दिसंबर के बीच किया गया. इस रिपोर्ट के अनुसार इस टूर्नामेंट का आयोजन, स्थानिय अधिकारियों की अनुमति से किया गया और सभी कोविड-19 नियमों का ख़याल रखा गया.  

इस टूर्नामेंट में कई नियमों के अलावा एक नियम ये भी था कि खिलाड़ियों को पहचान पत्र लेकर आना है और किसी अन्य जाति के खिलाड़ियों को खेलने की इजाज़त नहीं है. 


The Logical Indian की रिपोर्ट के अनुसार, टूर्नामेंट के एक आयोजक ने कहा,

हमने ब्राह्मण समुदाय को प्रोत्साहित करने के लिए टूर्नामेंट का आयोजन किया. हम किसी भी समुदाय को सपोर्ट करने के लिए टूर्नामेंट आयोजित करते. मुझे इसमें कोई समस्या नहीं दिखती. हम अपने आप को भारतीय समझते हैं, ब्राह्मण नहीं.

आयोजक का ये भी कहना था कि उन्हें पता नहीं था कि उनका टूर्नामेंट पोस्टर इसलिये वायरल हो जायेगा क्योंकि ये ‘ब्राह्मण टूर्नामेंट’ था. आयोजक ने बताया कि आयोजकों में कई दूसरे समुदायों के भी लोग थे और किसी को आपत्ति नहीं थी. 

The Brussel Times

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