बिहार और उत्तराखंड में सरकारी नौकरी की चाहत रखने वालों को अब एक नई मुसीबत का सामना करना होगा. दरअसल, बिहार और उत्तराखंड सरकार ने एक अनोखा फ़रमान जारी किया है.  

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इस आदेश में में साफ़ तौर पर कहा गया है कि, किसी भी शख़्स ने अगर किसी हिंसक विरोध प्रदर्शन या किसी धरना प्रदर्शन में हिस्सा लिया तो उसे सरकारी नौकरी और पासपोर्ट हासिल करने में मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा. इसके अलावा अगर आपने सोशल मीडिया पर कोई भड़काऊ पोस्ट किया तो भी सरकारी नौकरी और पासपोर्ट का अवसर खो देंगे.  

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मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लेने और सोशल मीडिया पर भड़काऊ पोस्ट करने वालों को पुलिस वेरिफ़िकेशन के दौरान इन 9 तरह की नौकरियों पर असर पड़ेगा. इनमें 'पासपोर्ट', 'चरित्र प्रमाण पत्र', 'सरकारी संविदा की नौकरी', 'सरकारी विभागों में ठेका के काम', 'बोर्ड और कमीशन', 'पेट्रोल पंप के लाइसेंस', 'गैस एजेंसी के लाइसेंस', 'सरकारी अनुदान' और 'बैंक लोन' शामिल हैं.

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पुलिस के निर्देश के अनुसार कहा गया है कि, किसी विरोध प्रदर्शन से क़ानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ने पर आपकी हिस्सेदारी महंगी पड़ने वाली है. इस तरह के विरोध प्रदर्शनों में हिस्सा लेने वालों के 'करेक्टर सर्टिफ़िकेट' पर लाल निशान लग सकता है. लिहाजा ऐसे लोगों को अब गंभीर परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहना होगा. 

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बिहार और उत्तराखंड सरकार के इस फरमान के बाद अब सरकारी नौकरी पाने या राज्य की शराब की दुकानों का ठेका हासिल करने में भी मुश्किल आ सकती है. 

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हिंदुस्तान टाइम्स से बातचीत में उत्तराखंड के DGP अशोक कुमार ने कहा है कि, उग्र प्रदर्शन में भाग लेने वाले और सोशल मीडिया पर प्रदर्शन का समर्थन करने वाले पोस्ट डालने वालों को पासपोर्ट का वेरिफिकेश करने में परेशानी का सामना करना पड़ेगा. पुलिस ऐसे सोशल मीडिया पोस्टों का रिकॉर्ड रखेगी जो उसके नज़रिए से राष्ट्र विरोधी और समाज विरोधी हैं.