देश के अलग-अलग राज्यों में प्रवासी मज़दूरों को क्वारन्टीन किया गया है. राज्य सरकार ने इन्हें अधिकतर सरकारी स्कूलों या फिर आवास कॉलोनियों में रखा है. यहां पर उनके खाने-पीने की भी उचित व्यवस्था की गई है. राजस्थान के सीकर में भी एक स्कूल में कुछ ऐसे ही प्रवासी मज़दूरों को रखा गया है. इस स्कूल की काफ़ी दिनों से पेंटिंग नहीं हुई थी. उसकी जर्जर हालत देख कर सभी मज़दूरों ने गांव के सरपंच से इजाज़त ली और पेंट कर स्कूल की काया ही पलट डाली.

ये पूरा मामला राजस्थान के सीकर ज़िले के पलसाना गांव के एक स्कूल का है. यहां पर यूपी, हरियाणा और बिहार के 54 मज़दूरों को क्वारन्टीन किया गया है. गांव वाले ही इनके खाने पीने का ख़्याल रख रहे हैं. इसे देखते हुए मज़दूरों ने स्वयं स्कूल को पेंट करने की बात कही थी. 

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इस पर सरपंच रूप सिंह शेखावत ने प्रशासन से अनुमति लेकर रंग-रोगन का सामान उपल्बध करवाया और पुताई का काम शुरू हुआ. इन मज़दूरों के साथ गांव के कुछ लोगों ने भी काम में उनका हाथ बंटाया है. ये सभी मज़दूर गांव वालों को उनके द्वारा की जा रही खातिरदारी के बदले में कुछ करना चाहते थे. इसलिए उन्होंने स्कूल को पेंट करने की स्वयं ही पेशकश की थी.

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कई सालों से इस स्कूल की पेंटिंग नहीं हुई थी. मज़दूरों इसके बदले रुपये लेने से भी इंकार कर दिया. IFS ऑफ़िस परवीन कासवान ने इनकी एक तस्वीर ट्वीट कर तारीफ़ की है.

सोशल मीडिया पर लोग इन मज़दूरों की तारीफ़ करते नहीं थक रहे हैं.

मज़दूरों ने इस स्कूल को पेंट कर समाज को मुश्किल हालातों में भी सकारात्मक सोच रखने के लिए प्रेरित किया है. 


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