कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को केरल की वायनाड सीट पर करीब 8 लाख वोट मिले. राहुल ने इस सीट से अपने विरोधी को 4,31,770 वोटों से शिकस्त दी. यहां से राहुल के ख़िलाफ़ एनडीए के उम्मीदवार तुषार वेल्लापल्ली चुनावी मैदान में उतरे थे.

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जबकि यूपी की अमेठी सीट राहुल गांधी हार चुके हैं. यहां से बीजेपी उम्मीदवार स्मृति ईरानी ने उन्हें कड़ी टक्कर दी. ख़ुद राहुल ने स्मृति ईरानी को इस जीत के लिए बधाई दी.

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अमेठी की सीट हारने के साथ ही वायनाड की प्रचंड जीत का कोई मतलब नहीं रह जाता है. अमेठी पिछले 5 दशकों से गांधी परिवार का गढ़ माना जाता है. लेकिन अब कांग्रेस के इस क़िले में सेंध लग चुकी है.

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पिछले साल भले ही राहुल ने स्मृति ईरानी को आसानी से हरा दिया था, लेकिन इस बार स्मृति ने पहले से ही क़मर कस ली थी. राहुल पिछली बार की तरह ही इस बार भी अमेठी सीट को हल्के में ले रहे थे. स्मृति पिछले 5 सालों से यहां अपनी पकड़ बनाने में लगी हुई थीं, जिसका नतीजा उन्हें अब मिल गया है.

अमेठी के अलावा कांग्रेस विधानसभा चुनावों में तीन राज्यों में मिली जीत को सही से भुना भी नहीं पाई-

मध्यप्रदेश

मध्यप्रदेश की भोपाल सीट कांग्रेस के लिए काफ़ी अहम मानी जा रही थी. इस सीट से पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह बीजेपी उम्मीदवार साध्वी प्रज्ञा से हार गए हैं.

राजस्थान

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राजस्थान की सभी 25 सीटों पर बीजेपी ने जीत दर्ज की है. पिछले साल विधानसभा चुनावों में कांग्रेस ने राजस्थान में शानदार जीत हासिल की थी. कांग्रेस को इस जीत का कोई फ़ायदा नहीं मिला. मुख्यमंत्री गहलोत भी अपनी सीट गंवा चुके हैं.

कर्नाटक

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कर्नाटक में कांग्रेस 5 साल राज कर चुकी है. पिछले साल विधानसभा चुनावों में उसे अन्य पार्टियों के सहयोग से सरकार बनाने का मौक़ा मिला था. लेकिन लोकसभा चुनावों में कर्नाटक में कांग्रेस के सभी दिग्गज हार चुके हैं.

केरल (15) छोड़ दें, तो कांग्रेस राजस्थान, गुजरात, ओडिशा, हिमाचल, उत्तराखंड, दिल्ली, हरियाणा, आंध्र प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में खाता भी नहीं खोल पाई.

यूपी में कांग्रेस ने सिर्फ़ रायबरेली (सोनिया गांधी) सीट पर ही जीत हासिल की है.

महाराष्ट्र, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, बिहार और झारखंड में कांग्रेस को सिर्फ़ एक-एक सीट ही मिल पायी. जबकि पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ में 2 सीट पर ही जीत हासिल की. वहीं कांग्रेस पूर्वोत्तर की 25 सीटों में से सिर्फ़ 4 सीट पर ही जीत हासिल कर पाई.

साल 2014 लोकसभा चुनावों में कांग्रेस को मात्र 44 सीटें मिली थी, जबकि इस बार कांग्रेस 52 सीटों पर सिमट गई.