3 साल पहले 98 साल की उम्र में MA करके एक नया कीर्तिमान बनाने वाले बिहार के राजकुमार वैश्य नहीं रहे. लंबे समय से बीमार चल रहे 101 वर्षीय राजकुमार ने सोमवार को पटना के राजेन्द्र नगर स्थित अपने आवास पर अंतिम सांस ली.

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साल 1940 में 'बैचलर ऑफ़ लॉ' की डिग्री हासिल करने वाले राजकुमार वैश्य ने 2015 में 96 वर्ष की उम्र में 'नालंदा ओपन यूनिवर्सिटी' में दाख़िला लिया. इस दौरान विश्वविद्यालय प्रशासन ने नियमों में बदलाव करते हुए उनके प्रवेश पत्र से लेकर उनकी शिक्षा सामग्री तक उनके घर पहुंचाई.

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राजकुमार वैश्य ने साल 2017 में 'नालंदा ओपन यूनिवर्सिटी' से अर्थशास्त्र में MA किया था. इस उपलब्धि के कारण उन्होंने 'लिम्का बुक ऑफ़ रिकॉर्ड्स' में अपना नाम दर्ज कराया था.

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राजकुमार वैश्य की सबसे खास बात ये थी कि अभियंता पद से सेवानिवृत होने के चार दशक बाद उन्होंने फिर से अपनी पढ़ाई शुरु की और सफ़लता हासिल कर जीवन का एक नया जज़्बा हासिल किया.

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बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राजकुमार वैश्य के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए कहा, 'मैं उनकी उपलब्धि पर व्यक्तिगत रूप से उन्हें बधाई देने के लिए 6 फ़रवरी, 2018 को उनके घर गया था और उनका आशीर्वाद भी लिया था.

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राजकुमार वैश्य जी के निधन की ख़बर पाने के बाद मैंने उनके बेटे डॉ. संतोष कुमार से भी फ़ोन पर बात की और उन्हें सांत्वना दी. संतोष कुमार 'बिहार कॉलेज ऑफ़ इंजीनियरिंग' में मेरे प्रोफ़ेसर हुआ करते थे. दिवंगत राजकुमार जी मेरे लिए पिता तुल्य थे. मैं सिर झुकाकर उनकी दिवंगत आत्मा को श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं.

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दिवंगत राजकुमार वैश्य उन तमाम लोगों के लिए एक प्रेरणाश्रोत हैं, जो सेवानिवृति के बाद जीवन की जंग से हारने लगते हैं. जीवन के आख़िरी पड़ाव में जंग जीतने वाले इस योद्धा को हमारा आख़िरी सलाम.