आपने अकसर एक समुदाय के ख़िलाफ दूसरे समुदाय को भड़काने वाली ख़बरें पढ़ी होंगी. ऐसे माहौल में सांप्रदायिक सौहार्द्र की कहानियां उम्मीद की किरण जगाने का काम करती हैं. ऐसी ही एक ख़बर गुजरात से आई है. यहां रमज़ान के महीने में हिंदु और मुस्लिम समुदायों के लोग साथ मिलकर रोज़ा-इफ़्तार करते हैं.

रमज़ान के दौरान मुस्लिम समुदाय के लोग रोज़ा रखते हैं. शाम को वो इफ़्तार के साथ अपना रोज़ा खोलते हैं. इस दौरान कई तरह के पकवान और फल खाने का रिवाज़ है. वैसे तो इफ़्तार मुस्लिम सुमदाय के लोग ही करते हैं, लेकिन सूरत की हज़रत ख़्वाजा दरगाह में हर साल कुछ अलग ही नज़ारा देखने को मिलता है.

रमज़ान के महीने में यहां हिंदू-मुस्लिम दोनों धर्म के लोग इक्कठा होकर इफ़्तार करते हैं. यहां आए ऐसे ही एक श्रद्धालु हैं, के. घीवाला. ये पिछले 5 साल से इस दरगाह पर आ रहे हैं. ANI से इस बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा- 'मैं इस दरगाह में पांच साल से आ रहा हूं. कई हिंदू इस दरगाह में आते हैं. ये धार्मिक सद्भाव का एक बड़ा प्रतीक है.'

ऐसे ही एक अन्य श्रद्धालु ने कहा-मैं यहां पिछले 38 सालों से आ रहा हूं. इस दरगाह में सभी धर्म के लोग प्रार्थना करने आते हैं. इफ़्तार सिर्फ़ मुस्लिमों के लिए नहीं है, ये सभी के लिए है.

अगर कौमी एकता की मिसाल देखनी है, तो आपको एक बार यहां ज़रूर जाना चाहिए.