इस साल सरकार द्वारा दिए जाने वाले नागरिक सम्मान में वैसे नाम भी थे जिसे सामान्य भाषा में 'आम आदमी' कहा जाता है. अपनी इच्छाशक्ति और सीमित संसाधनों के दम पर उन्होंने समाज में बदलाव लाने की कोशिश की और सफ़ल भी हुए.

हालांकि, ये मामला थोड़ा अलग है. अल्मोड़ा के मुख्य शिक्षा अधिकारी जगमोहन सोनी को गणतंत्र दिवस के मौके पर उत्तराखंड सरकार द्वारा शिक्षा में क्षेत्र में बेहतरीन काम के लिए समम्मानित किया गया और घंटेभर बाद जगमोहन सोनी को उनके पद से हटा दिया गया.

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जहां एक ओर राज्य कैबिनेट मिनिस्टर हरक सिंह रावत बीते शनिवार को जगहमोहन सोनी को सम्मानित कर रहे थे, वहीं दूसरी ओर देहरादून में उनकी बर्ख़ास्तगी का ऑर्डर टाइप हो रहा था.

जगमोहन सोनी भ्रष्टाचार को आरोप का हवाला देकर हटाया गया है. Times Of India की रिपोर्ट के अनुसार, मामले की गंभीरता को देख कर राष्ट्रीय अवकाश के दिन भुपेंद्र कौल औलख को ऑफ़िस बुलाकर निलंबन पत्र पर हस्ताक्षर करवाया गया.

बकौल रिपोर्ट, जगमोहन सोनी के निलंबन के पीछे कोई ख़ास वज़ह नहीं बताई गई है. उनके ऊपर कथीत रूप से शिक्षकों के चयन में घूस लेने का आरोप है.

जगमोहन सोनी ने मीडिया से कहा, 'मेरे ऊपर जो आरोप लगाए गए हैं उनसे मैं वाक़िफ हूं लेकिन वो सब आधारहीन है. जिस दिन मुझे राज्य सरकार द्वार अपने काम के लिए सम्मानित किया गया उसी दिन मेरे पद से मुझे हटा दिया गया. ये बेतुका है.'

अधिकारियों के अनुसार, पद से हटाने का निर्णय अरविंद पांडे द्वारा लिया गया है.अल्मोड़ा के स्थानीय निवासियों ने कुछ अधिकारियों के ख़िलाफ़ भर्ती के दौरान एक लाख रुपये घूस लेने की शिकायत की थी,उन अधिकारियों की सूची में जगमोहन सोनी का भी नाम था.