देश की ऐतिहासिक धरोहर 'ताजमहल' को प्रदूषण से बचाने के लिये अब विज्ञान का सहारा लिया जाएगा और इस काम ज़िम्मा भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) को दिया गया है. रिपोर्ट के अनुसार, समय के साथ प्रदूषण की वजह से ताजमहल पर लगे संगमरमर के रंग में क्या बदलाव आया है, इसका पता लगाने के लिये अब स्पेक्ट्रोग्राफ़ी का इस्तेमाल किया जाएगा.  

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बताया जा रहा है कि ASI ने मडपैक ट्रीटमेंट के दौरान तमाम पत्थरों को इस शोध के लिये छोड़ा था, ताकि इस तरीके से ताजमहल के असली रंग और प्रदूषण के कारण आए रंग में फ़र्क पता किया जा सके. ASI के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, साइंस ब्रांच ने अधिक्षण पुरातत्व रसायनविद डा. एमके भटनागर के नेतृत्व में मडपैक ट्रीटमेंट की शुरुआत की और पहले चरण में मीनारों और चारों छोटे गुंबदों की सफ़ाई का काम पूरा किया गया. इसके साथ ही इस ट्रीटमेंट में किसी तरह के रयासन का उपयोग नहीं किया गया है.  

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इस रिपोर्ट में ये भी कहा गया कि ताजमहल के संगमरमर के रियल रंग की जानकरी के साथ ही स्पेक्ट्रोग्राफ़ी का भी पूरा रिकॉर्ड रखा जाएगा, ताकि भविष्य में ASI के पास ताज के रंग बदलने की जानकारी बनी रहे और इसके साथ ही ये रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में भी पेश की जाएगी.