‘मरने के बाद तेरा-मेरा धर्म क्या मुसाफ़िर

तू बोल नहीं सकता मैं पूछ नहीं पाता’

ज़िंदगी का सफ़र गफ़लत के रास्ते पर चलकर गुज़ार दिया. ‘तू कौन, मैं ये’ कुछ यूं एक ही रास्ते पर लड़ते हुए मंज़िल पर पहुंच गए. हासिल हुई तो बस नफ़रतें. हालांकि, कुछ लोग होते हैं, जो बेहतर मंजिल की तलाश में नहीं बल्क़ि रास्तों को ख़ूबसूरत बनाने के लिए सफ़र पर निकलते हैं. महाराष्ट्र के कुछ मुस्लिम युवा इस बात की जीती जागती मिसाल हैं.

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दरअसल, शनिवार को एक 78 वर्षीय हिंदू बुज़ुर्ग़ की हार्ट अटैक से मौत हो गई. कथित तौर पर परिवार ने उनका अंतिम संस्कार करने से मना कर दिया. ऐसे में एक स्थानीय संगठन के कुछ मुस्लिम युवा सामने आए और बुज़ुर्ग़ की चिता को आग दी.

एक ओर जहां शख़्स की दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई. वहीं, उनकी पत्नी का अकोला के सरकारी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल (GMCH) में कोरोना वायरस का इलाज चल रहा है. The Indian Express की रिपोर्ट के मुताबिक़, अकोला म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के स्वच्छता विभाग के प्रमुख प्रशांत राजुरकर ने बताया, ‘इस व्यक्ति का बेटा नागपुर में रहता है, उसने शव का अंतिम संस्कार करने से मना कर दिया. ऐसे में स्थानीय मुस्लिम संगठन अकोला कच्छी मेमन जमात ने ये ज़िम्मेदारी अपने ऊपर ले ली और रविवार को कुछ मुस्लिम लोगों ने श्मशान में चिता को आग दी.’

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अकोला सबसे बड़े कोरोना वायरस हॉटस्पॉट में से एक है. यहां 400 से ज़्यादा पॉज़िटिव केस और 25 मौतें हो चुकी हैं. अमरावती के डिवीज़नल कमिश्नर पीयूष सिंह ने बताया, ‘23 मई को शाम क़रीब 4 बजे मृतक की पत्नी को GMCH में एडमिट किया गया था. उनमें कोरोना के लक्षण नज़र आए थे. GMCH के डीन को शाम क़रीब 6.30 बजे एक मैसेज आया कि वो आदमी घर पर गिर गया है. जब तक एंबुलेंस पहुंची तब तक उनकी मौत हो चुकी थी. 24 मई की सुबह पत्नी की रिपोर्ट पॉज़िटिव आई. प्रोटोकॉल के अनुसार मृत शरीर से स्वैब नहीं लेते हैं, लेकिन क़रीबी रिश्तेदारों के स्वैब ले लिए जाते हैं. इसलिए रिपोर्ट का इंतजार है.'

मुस्लिम संगठन के अध्यक्ष जावेद ज़केरिया ने कहा, ‘अकोला ने कोरोना के चलते पहली मृत्यु की सूचना देने के बाद हमने उन लोगों के लिए अंतिम संस्कार करने का फ़ैसला किया जिनके परिवार ऐसा करने में असमर्थ हैं. उसके बाद से हम अब तक 60 अंतिम संस्कार कर चुके हैं, जिनमें से 21 Covid मरीज़ थे. इनमें सेस पांच हिंदू थे.’

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इसके साथ ही उन्होंने बताया, उनके स्वयंसेवकों ने पीपीई पहना, और ज्यादातर मामलों में चिता को जलाने के बाद रुक जाते हैं. हालांकि, रविवार के अंतिम संस्कार में उन्होंने चिता भी जलाई. मृतक के बेटे से संपर्क नहीं किया जा सका.

राजुरकर ने कहा कि वो अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हुए लेकिन अंतिम संस्कार के लिए उन्होंने 5,000 रुपये दिए. उन्होंने कहा, ‘रविवार के अंतिम संस्कार ने कुछ लोगों को नाराज़ कर दिया है. वे परेशान हैं कि मृतक का नाम सार्वजनिक डोमेन में है, और मीडिया कवरेज के कारण बेटा परेशान है.'

वहीं, सोमवार को अकोला में Covid-19 से एक और व्यक्ति की मौत हो गई है, जिसके बाद कुल मौतों का आंकड़ा बढ़कर 25 पर पहुंच गया है. मृतक एक महिला थी, जिसे 19 मई को GMCH में एडमिट कराया गया था और 23 मई को इसका सैंपल लिया गया था. बता दें, अकोला में अब तक 400 से ज्यादा केस सामने आ चुके हैं. सोमवार को नागपुर में भी Covid-19 से एक शख़्स की मौत हुई है, जिसके बाद कुल मौतों की संख्या 8 हो गई है. साथ ही विदर्भ क्षेत्र में अब तक 53 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं.