वाराणसी की सीट अभी तक सिर्फ़ बीजेपी-कांग्रेस के बीच मुक़ाबला लग रही थी, लेकिन इस खेल में समाजवादी पार्टी ने गेम ऑन कर दिया है. इससे पहले कोई सोच पाता सपा ने वाराणसी में पीएम मोदी और कांग्रेस के अजय राय की टक्कर में पूर्व बीएसएफ़ जवान तेज बहादुर यादव को उतरा है. हां वही तेज बहादुर, जो पहले पीएम मोदी के ख़िलाफ़ निर्दलीय चुनाव लड़ने की बात कह रहे थे. वाराणसी में अब असल में चुनावी दंगल होने जा रहा है.

तेज बहादुर भारतीय सेना के वही जवान हैं जिन्होंने साल 2017 में एक वीडियो जारी कर जवानों को मिलने वाले खाने की क्वालिटी को लेकर शिकायत की थी. हालांकि उस विवाद के बाद उन्हें सेना से बर्खास्त कर दिया गया था. इसके बाद से तेज बहादुर अक्सर केंद्र सरकार के ख़िलाफ़ आवाज उठाते रहे हैं.

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पिछले कुछ सालों से तेज बहादुर यादव लगातार भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाते आये हैं. इसके बाद उन्होंने इसी को मुद्दा बनाते हुए निर्दलीय चुनाव लड़ने का ऐलान किया था.

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मौजूदा दौर में 'भारतीय जनता पार्टी' राष्ट्रवाद के मुद्दे पर लोकसभा चुनाव लड़ रही है. अब महागठबंधन ने बीजेपी के सामने एक पूर्व सैनिक को मैदान में उतारकर इस लड़ाई को और दिलचस्प बना दिया है. दिल्ली के मुख़्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल इस कदम के लिए अखिलेश यादव को शुभकामनाएं दे चुके हैं. कांग्रेस तेज़ बहादुर यादव का समर्थन करेगी, अभी इस बात की पुष्टि नहीं हुई है.

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बीते साल वाराणसी सीट से BJP प्रत्याशी के रूप में नरेंद्र मोदी विजयी रहे थे. उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी अरविंद केजरीवाल को कुल 3,71,784 वोटों के भारी अंतर से हराया था. नरेंद्र मोदी को कुल 5,81,022 वोट मिले तो अरविंद केजरीवाल को कुल 2,09,238 मत मिले. जबकि कांग्रेस प्रत्याशी अजय राय 75,614 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे. वहीं चौथे स्थान पर बहुजन समाज पार्टी और पांचवें स्थान पर समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार थे.

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कुछ दिन पहले ही प्रधानमंत्री मोदी ने वाराणसी से अपना नामांकन दाखिल किया था. इस दौरान उन्होंने वाराणसी में मेगा रोड शो कर विपक्ष को अपनी ताकत का एहसास कराया था. इसके बाद सपा-बसपा ने संयुक्त रूप से पूर्व बीएसएफ़ जवान तेज बहादुर यादव को अपना उम्मीदवार नियुक्त किया है.