NEET और JEE परीक्षा की तारीख़ें जैसे-जैसे नज़दीक आती जा रही हैं, वैसे-वैसे देशभर में छात्रों का विरोध भी बढ़ता जा रहा है. तमाम छात्र उपवास, काली पट्टी और सोशल मीडिया के ज़रिए अपनी नाराज़गी जता रहे हैं.

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दरअसल, COVID-19 ख़तरे के अलावा भी इस वक़्त देश के कई राज्यों में हालात ठीक नही हैं. बिहार, गुजरात और असम जैसे राज्य बाढ़ से प्रभावित हैं, केरल में अत्यधिक वर्षा से कई जिलों में परेशानी हो रही है, जम्मू और कश्मीर में कई स्थानों में अभी भी इंटरनेट पर प्रतिबंध जारी है. ऐसे में परीक्षा केंद्रों तक पहुंचना बहुत मुश्किल है, साथ ही ट्रांसपोर्ट के साधन भी सीमित हैं.

राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन के चलते कई अभिभावकों की नौकरियां जा चुकी हैं, तो कुछ के वेतन में कमी हुई है. ऐसे में उनका कहना है कि वे अपने बच्चों को निजी वाहनों में परीक्षा केंद्रों में भेजने में फ़िलहाल सक्षम नही हैं. बता दें, इस वर्ष 8.58 लाख से अधिक छात्रों ने JEE और 15.97 लाख के क़रीब छात्रों ने NEET (UG) के लिए पंजीकरण कराया है.

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महाराष्ट्र के जलगांव में रहने वाली यासमीन सैय्यद के दो बच्चे इस साल NEET का एग्ज़ाम देंगे. उन्होंने कहा कि, ‘मैं NEET और JEE परीक्षा को स्थगित करने के लिए मानव संसाधन विकास मंत्रालय (MHRD) से अनुरोध करती हूं, क्योंकि मेरी बेटी और बेटा दोनों ही ये एग्ज़ाम दे रहे हैं. कोविड-19 के चलते पैदा हुए इस असुरक्षित माहौल में उन्हें एग्ज़ाम में भेजना ठीक नहीं लग रहा है.’

उन्होंने आगे कहा कि, ‘हज़ारों छात्र परीक्षा देने एक ही केंद्र पर जाएंगे. अगर कुछ हो गया तो क्या होगा? इसका कोई विकल्प तलाशना चाहिए, ताकि बच्चों को साल बर्बाद न हो.’

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बता दें, इंजीनियरिंग उम्मीदवारों के लिए JEE परीक्षा आमतौर पर अप्रैल में आयोजित की जाती है, जबकि मई में मेडिकल उम्मीदवारों के लिए NEET. इस साल COVID-19 महामारी के कारण इसमें काफ़ी देरी हुई है. कोरोना वायरस के चलते परीक्षाओं को दो बार स्थगित किया गया था. JEE परीक्षा अब 1 से 6 सितंबर के बीच होने वाली है, जबकि NEET की परीक्षाएं 13 सितंबर को होनी हैं.

सड़क से लेकर सोशल मीडिया तक विरोध प्रदर्शन जारी

AISA, SFI और NSUI जैसे छात्र संगठन लगातार सड़कों और सोशल मीडिया पर परीक्षा को स्थगित करने की मांग कर रहे हैं. सोशल मीडिया पर अपना विरोध ज़ाहिर करने के लिए ट्विटर पर #ProtestAgainstExamsinCovid का इस्तेमाल किया जा रहा है.

AISA के राष्ट्रीय अध्यक्ष एन साई बालाजी ने कहा, ‘पहले NEET, JEE, UPSC, NDA, CLAT फिर दिल्ली यूनिवर्सिटी के एंट्रेंस एग्ज़ाम समेत अन्य परीक्षाएं होनी हैं. छात्र कह रहे हैं कि सरकार ने उन्हें बंद के दौरान घर भेज दिया, कोई सार्वजनिक परिवहन उपलब्ध नहीं है, कुछ राज्यों में बाढ़ और भारी वर्षा हुई है. अब हम परीक्षा के लिए कैसे आए? कोरोना वायरस के मामले केवल बढ़ रहे हैं. इस स्थिति में सरकार हमें, हमारे साथ हमारे परिवार की हेल्थ को ख़तरे में डालने के लिए कह रही है, जब हम अच्छी तरह से देश के अपर्याप्त हेल्थ सिस्टम को जानते हैं.’

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वहीं, महाराष्ट्र के तांबादमल की रहने वाली 19 साल की वैष्णवी म्हात्रे भी NEET की तैयारी करती हैं. वो पिछले तीन साल से परीक्षाओं की तैयारी कर रही है. उनका कहना है कि ये परीक्षा ख़ासतौर से महिला छात्रों के लिए भेदभावपूर्ण है. उन्होंने कहा, परीक्षा केंद्र के लिए मेरी पसंद ठाणे थी, जो क़रीब है. लेकिन उन्होंने मुझे अमरनाथ दिया, जो मेरे घर से लगभग दो घंटे की दूरी पर है.’

उनका कहना है कि बहुत सी लड़कियों को घरवालें अकेले ट्रैवल नहीं करने देते हैं. ऐसे में इस एग्ज़ाम के चलते हम अपने साथ-साथ उनके स्वास्थ्य को भी ख़तरे में डालेंगे.

ऐसे में देशभर में छात्र संगठन NEET और JEE परीक्षा को इस वक़्त कराने का विरोध कर रहे हैं.