सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को 'सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट' (Central Vista Project) को हरी झंडी दे दी है. इसके साथ ही देश के नए संसद भवन बनने का रास्ता भी साफ़ हो गया है. कोर्ट के इस फ़ैसले से केंद्र सरकार को बड़ी राहत मिली है.  

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कोर्ट ने कहा कि, सरकार नए संसद भवन और अन्य निर्माण कर सकती है. पर्यावरण मंजूरी और अन्य अनुमतियों में कोई खामी नहीं है. सुप्रीम कोर्ट 2:1 के बहुमत से ये फ़ैसला सुनाया है. हालांकि, पिछली सुनवाई में SC ने निर्माण और तोड़फोड़ पर रोक लगाते हुए सिर्फ़ नए संसद भवन के शिलान्यास की अनुमति दी थी.  

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विपक्षी पार्टियों का आरोप है कि, मोदी सरकार कोरोना काल में 'सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट' के नाम पर भारी-भरकम खर्च कर रही है. इस पैसे का इस्तेमाल ग़रीबों की मदद के लिए किया जा सकता है.  

आख़िर क्या है सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट? 

'सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट' के तहत 'राष्ट्रपति भवन' से लेकर 'इंडिया गेट' तक फैले 13.4 किमी लंबे राजपथ पर पड़ने वाले सरकारी भवनों का पुनर्निमाण या पुनर्उद्धार किया जाना है. केंद्र सरकार का नया संसद भवन, एक नया आवासीय परिसर बनाकर पुनर्विकास करने का प्रस्ताव है, जिसमें प्रधानमंत्री और उपराष्ट्रपति के आवास के अलावा कई नए कार्यालय भवन होंगे ताकि सभी मंत्रालय और विभाग समायोजित किया जा सके. 

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'सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट' की अनुमानित लागत 20,000 करोड़ रुपये है, जिसमें से क़रीब 1000 करोड़ रुपये नए संसद भवन के निर्माण पर खर्च होंगे. इस प्रोजेक्ट के 2024 में पूरा होने का अनुमान है. प्रधानमंत्री मोदी ने हाल ही में देश के नए संसद भवन परिसर का शिलान्यास किया था.

इस प्रोजेक्ट से होगी 1000 करोड़ रुपये की बचत  

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दलील दी थी कि, 20,000 करोड़ रुपये का 'सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट' पैसे की बर्बादी नहीं, बल्कि इससे पैसों की बचत होगी. इस प्रोजेक्ट से सालाना क़रीब 1000 करोड़ रुपये की बचत होगी, जो फ़िलहाल 10 इमारतों में चल रहे मंत्रालयों के किराए पर खर्च होती है.

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बता दें कि 'सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट' के तहत बन रहा नया संसद भवन 64,500 वर्ग मीटर में फैला होगा. इसे बनाने में कुल 971 करोड़ का खर्च आएगा. देश का नया संसद भवन त्रिभुज के आकार का होगा. इसका निर्माण कार्य 15 अगस्त, 2022 यानी देश के 75वें स्वतंत्रता दिवस तक पूरा कर लेने की संभावना है.  

देश के नए संसद भवन में 888 लोकसभा सदस्यों के बैठने की क्षमता होगी, जबकि संयुक्त सत्र में इसे 1224 सदस्यों तक बढ़ाने का विकल्प भी रखा जाएगा. राज्यसभा के सदन में कुल 384 सदस्य बैठ सकेंगे और भविष्य को ध्यान में रखते हुए इसमें भी जगह बढ़ाने का विकल्प रखा जाएगा.