22 जनवरी को निर्भया केस के चारों गुनहगारों को फांसी दी जानी है. इससे पहले 4 दोषियों में शामिल विनय शर्मा और मुकेश सिंह ने 'क्यूरेटिव पिटीशन' दायर की थी. इसे सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों की बेंच ने मंगलवार को ख़ारिज कर दिया

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हालांकि, आरोपी विनय शर्मा और मुकेश सिंह के पास अब सिर्फ़ राष्ट्रपति के पास दया याचिका भेजने का विकल्प ही बचा है, जबकि बाकी 2 दोषियों अक्षय ठाकुर और पवन गुप्ता के पास क्यूरेटिव पिटीशन और दया याचिका के 2 विकल्प बाकी हैं.

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हालांकि, इस तरह के मामलों में माफ़ी की गुंजाइश बेहद कम होती है. उधर तिहाड़ जेल ने भी फांसी की तैयारियां पूरी कर ली हैं.

पटियाला हाउस कोर्ट के निर्णय के बाद निर्भया की मां आशा देवी ने कहा था कि- ये मेरे लिए बड़ा दिन है. मैं बीते 7 सालों से किस दर्द से गुज़र कर रही हूं ये मुझे ही मालूम है. मेरे लिए 22 जनवरी का दिन सबसे बड़ा दिन को होगा, जब दोषियों को फांसी के फंदे पर लटकाया जाएगा.

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जानकारी दे दें कि हाल ही में दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने दोषी अक्षय ठाकुर (31), पवन गुप्ता (25), मुकेश सिंह (32) और विनय शर्मा (26) का डेथ वॉरंट जारी किया था. अदालत ने चारों दोषियों को एक साथ 22 जनवरी की सुबह 7 बजे फांसी पर लटकाने का वक्त मुकर्रर किया है.

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हालांकि, रविवार को दोषियों की डमी को फांसी दी गई थी. फांसी से पहले इस प्रक्रिया को रिहर्सल के तौर पर जाना जाता है. इसके लिए पत्थरों और मलबे से चारों दोषियों की डमी उनके वजन के हिसाब से तैयार की गई थी. इस प्रक्रिया के लिए पवन जल्लाद को नहीं बुलाया गया था.