बीते शनिवार आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम ज़िले से एक शर्मनाक घटना सामने आई. नर्सिपट्टनम इलाके में पुलिस ने एक निलंबित डॉक्टर के साथ कथित तौर पर मारपीट की. इस दौरान पुलिस ने विरोध जाता रहे डॉक्टर के हाथ बांध दिए थे.

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दरअसल, एक पुलिस कांस्टेबल द्वारा डॉ. के. सुधाकर को लात मारने और सड़क पर घसीटने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया. इसके बाद न केवल विपक्षी दलों, बल्कि आम नागरिकों ने भी इसे लेकर नाराज़गी जताई है.

वीडियो में डॉक्टर सुधाकर शर्ट उतारकर सड़क पर चलते हुए नज़र आ रहे हैं. इसके बाद पुलिस उनके हाथ बांध देती है और एक कांस्टेबल उन्हें लाठी से पीटने लगता है. कुछ देर बाद डॉक्टर सड़क पर लेटे हुए नज़र आते हैं इस दौरान उनके दोनों हाथ बंधे थे. इसके बाद पुलिस सुधाकर को एक ऑटो में डालकर पुलिस स्टेशन ले जाती है.

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़, डॉ. सुधाकर कथित तौर पर नशे में थे और पालम पोर्ट हॉस्पिटल जंक्शन के पास कपड़े उतारकर उपद्रव कर रहे थे. इस दौरान कार सवार सुधाकर ने जंक्शन के पास की मुख्य सड़क पर लगे बैरिकेड्स को हटाने की कोशिश भी की थी. इसके साथ ही उन्होंने एक बाइक सवार को टक्कर भी मारी थी.

पुलिस ने दावा किया कि डॉ. सुधाकर ने अपनी कमीज़ फाड़ ली और एक कांस्टेबल का फ़ोन को तोड़ दिया था. हालांकि, डॉ. सुधाकर ने साफ़ तौर पर इस बात से इंकार किया है कि वो नशे में थे.

कौन हैं डॉक्टर सुधाकर?

डॉ. सुधाकर नर्सिपट्टनम सरकारी अस्पताल में एनेस्थेसियोलॉजिस्ट हैं. सुधाकर ने राज्य सरकार पर डॉक्टरों को पर्याप्त संख्या में पीपीई किट और एन-95 मास्क उपलब्ध न कराने के आरोप लगाए थे. इसके बाद पिछले महीने 8 अप्रैल को जगन मोहन रेड्डी सरकार ने उन पर अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए निलंबित कर दिया था.

डॉक्टर सुधाकर के सस्पेंड होने के 1 महीने बाद उनके साथ इस तरह की शर्मनाक घटना सामने आई है. इसे लेकर विपक्षी दल 'तेलुगु देशम पार्टी' ने नाराज़गी व्यक्त की है.

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टीडीपी महासचिव नारा लोकेश ने ट्वीट कर कहा कि, 'डॉ. सुधाकर को केवल एक मास्क मांगने पर ग़लत तरीके से निलंबित कर दिया गया था. दलित डॉक्टर को अब जगन मोहन रेड्डी सरकार द्वारा लाठी-डंडों से पीटा जा रहा है. हम इस घटना की निंदा करते हैं.