इंसान के जीवन के मायने उसे स्वयं कभी ज्ञात नहीं होते. एक शिक्षक उसे दिशा देता है. हालांकि महात्मा बुद्ध ने “अप्प दीपो भव” कह कर बात में थोड़ा अंतर विरोध पैदा कर दिया, लेकिन वो गुरु अर्थात शिक्षक की महत्ता का वर्णन भी करते हैं.

5 सितंबर का दिन “शिक्षक दिवस” के रूप में मनाया जाता है. इस दिन शिक्षक बच्चों को प्रेरणादायक बातें बताते हैं. लेकिन आज हम बच्चों को नहीं, बल्कि शिक्षकों को भी कुछ बताना चाहते हैं. हम बताना चाहते हैं कि एक शिक्षक हमेशा सही ही नहीं हो सकता. सवाल करना एक विद्यार्थी की प्रवृति है. हम सवाल करते हैं हर एक शिक्षक से… अगर वो स्वयं को हमेशा सही मानते हैं तो वो खुदा हैं. और अगर गलती की संभावना है तो हम उन्हें शिक्षक मान सकते हैं क्योंकि ग़लतियां इंसान से होती हैं, ख़ुदा से नहीं.

1. ओशो – जीवन से प्रेम करो, और अधिक खुश रहो. जब तुम एकदम प्रसन्न होते हो, संभावना तभी होती है, वरना नहीं.

2. महात्मा बुद्ध- जैसे मैं हूं, वैसे ही वे हैं, और जैसे वे हैं, वैसा ही मैं हूं. इस प्रकार सबको अपने जैसा समझ कर न किसी को मारें, न मारने को प्रेरित करें.

3. स्वामी विवेकानंद- जो सत्य है, उसे साहसपूर्वक निर्भीक हो कर लोगों से कहो, उससे किसी को कष्ट होता है या नहीं, इस ओर ध्यान मत दो. दुर्बलता को कभी प्रश्रय मत दो.

4. महात्मा गांधी- डर शरीर का रोग नहीं है, यह आत्मा को मारता है.

5. बाबा साहब अंबेडकर- जीवन लम्बा होने के बजाय महान होना चाहिए.

 

6. सर्वपल्ली डॉ राधाकृष्णन- शिक्षक का काम सिर्फ़ किताबी ज्ञान देना ही नहीं बल्कि सामाजिक परिस्थितियों से छात्रों को परिचित कराना भी होता है.

7. मैडम क्यूरी- लोगों को उनकी वेशभूषा से नहीं बल्कि उनके विचारों से पहचानना चाहिए.

8. ए.पी.जे अब्दुल कलाम- आइये अपने आज को कुर्बान कर दें, ताकि हमारे बच्चों का कल बेहतर हो.

9. स्वामी दयानंद सरस्वति- सबकी उन्नति में ही अपनी उन्नति समझनी चाहिए.

10. अरस्तु- हर व्यक्ति के नज़रिये के हिसाब से उसका नज़रिया अलग-अलग होता है.

11. अल्बर्ट आइस्टीन- जिस व्यक्ति ने कभी ग़लती नहीं की उसने कुछ नया करने की कोशिश भी नहीं की.

12. स्टीव जोब्स- क्वॉलिटी हमेशा क्वॉंन्टिटी से ज्यादा महत्व रखती है. सो, क्वॉलिटी पर ध्य़ान दें.

13. स्टीफ़न विलियम हाकिंग- चाहे ज़िन्दगी जितनी भी कठिन लगे, आप हमेशा कुछ न कुछ कर सकते हैं और सफ़ल हो सकते हैं.

14. पंडित जवाहर लाल नेहरू- विफ़लता तभी होती है जब हम अपने आदर्शों, उद्देश्यों और सिद्धांतों को भूल जाते हैं.

15. मदर टेरेसा- यदि हमारे मन में शांति नहीं है तो इसकी वजह है कि हम यह भूल चुके हैं कि हम एक दूसरे के हैं.

16. चाणक्य- काम का निष्पादन करो, परिणाम से मत डरो.

17. नेल्सन मंडेला- एक अच्छा दिमाग और एक अच्छा दिल हमेशा ही एक खतरनाक मेल होता है.

18. रविन्द्रनाथ टैगोर- जब कोई तुम्हारा साथ न दे तो क्या हुआ, तुम अकेले चलो.

शिक्षक एक माली की तरह होता है जो गिरते बच्चे को मारता-पीटता नहीं बल्कि उस बच्चे को सहारा दे कर उठने को प्रोत्साहित करता है. तो आईये अपने शिक्षकों को याद करे और उनके विचारों की राह पर चलें.