कोलकाता में जन्मी और मुंबई में पली-बड़ी 29 वर्षीय स्नेहा शर्मा को जीवन में बस दो चीज़ों से प्यार है पहला- रेसिंग जबकि दूसरा- फ्लाइंग. स्नेहा इस समय भारत की सबसे तेज़ महिला F4 रेसर हैं. वो भारत की तरफ़ से अब तक 40 से अधिक इंटरनेशनल रेस में भाग ले चुकी हैं.

सिर्फ़ इतना ही नहीं स्नेहा इंडिगो एयरलाइन्स में पायलट भी हैं. स्नेहा महीने के 6 दिन 'एयरबस 320' उड़ाती हैं जबकि बाक़ी दिनों में वो F4 रेसर के तौर पर काम करती हैं.

भारत की सबसे तेज़ महिला F4 रेसर स्नेहा शर्मा का ये सफ़र आसान नहीं रहा. अपने पैशन को फ़ॉलो करने के लिए स्नेहा को भी अपने परिवार और समाज की स्टीरियोटाइप थिंकिंग से जंग लड़नी पड़ी थी.

दरअसल, स्नेहा को 16 साल की उम्र में ज़मीनी और हवाई स्पीड से प्यार हो गया था. ड्राइविंग लाइसेंस मिलने से पहले ही उन्हें फ़्लाइंग और रेसिंग का लाइसेंस मिल गया.

जब स्नेहा 11वीं कक्षा में थी वो अपनी पॉकेट मनी से रेस ट्रैक्स जाकर बाक़ी रेसर को रेस करते हुए देखा करती थीं. इस दौरान मौक़ा मिलने पर रेसर्स के पास जाकर इनसे रेसिंग के बारीकियां सीखने की कोशिश करती थीं. 11वीं कक्षा के दौरान ही स्नेहा को शहर के एक रेस इवेंट में हिस्सा लेने का मौक़ा मिला. इसके बाद उन्हें नेशनल्स के लिए चुन लिया गया.

स्नेहा नेशनल्स के लिए चुने जाने से बेहद ख़ुश थीं, लेकिन उनके माता-पिता चाहते थे कि वो पढ़ाई पर ध्यान दे. इस दौरान वो अपने स्कूल बैग में हेलमेट रख कर ले जाया करती थीं. पढाई और प्रैक्टिस दोनों साथ किया करती थीं. इस दौरान स्नेहा ने न सिर्फ़ एग्जाम पास किया बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर 'एमआरएफ़ नेशनल कार्टिंग चैंपियनशिप' में जगह भी बनाई.

साल 2007 में मात्र 17 साल की उम्र में स्नेहा फ़्लाइंग क्लास के लिए सैन फ्रांसिस्को चली गईं. भारत वापस आने के बाद उन्होंने प्रैक्टिस के साथ-साथ रेसिंग ट्रैक्स पर पार्ट टाइम जॉब करनी भी शुरू कर दी.

साल 2010 में स्नेहा ने चेन्नई और कोयंबटूर रेसिंग ट्रैक पर देश भर से चयनित 20 ड्राइवरों के साथ रेस लगाई. इस दौरान वो एक मात्र ऐसी ड्राइवर थीं जिन्होंने 'वोक्सवैगन पोलो कप' और 'टोयोटा ईएमआर' दोनों में आख़िर तक रेस की. 1 साल बाद स्नेहा ने देश की दो एयरलाइंस में फ़्लाइंग के लिए आवेदन किया. इसके बाद उन्होंने 'इंडिगो एयरलाइंस' में शामिल होने का फ़ैसला किया.