प्रदूषण, आज एक बड़ी समस्या बन चुका है. हर साल कई लोग प्रदूषण के चलते अपनी जान गंवा रहे हैं, तो लाखों लोग सांस संबंधी बीमारियों का शिकार हो रहे हैं. लेकिन अब एक नई रिसर्च के अनुसार, प्रदूषण के कारण पुरुषों के लिंग सिकुड़ रहे हैं और जननांग भी ख़राब हो रहे हैं.

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ये दावा पर्यावरण वैज्ञानिक डॉ. शन्ना स्वान ने रिसर्च के बाद अपनी नई किताब ‘काउंटडाउन' में किया है. डॉ. स्वान ने इसे इंसानों के ‘अस्तित्व पर संकट’ क़रार दिया है. डॉ. शन्ना न्यूयॉर्क के Mount Sinai अस्पताल में पर्यावरण एंड मेडिसिन की डॉक्टर और प्रोफ़ेसर हैं.

पर्यावरण वैज्ञानिक ने कहा कि इसके पीछे वजह इंसानों द्वारा प्लास्टिक बनाने में इस्तेमाल होने वाला केमिकल है, जो हार्मोन-उत्पादक एंडोक्राइन सिस्टम को प्रभावित करता है. इस वजह से इंसानों की प्रजनन क्षमता में तेजी से गिरावट दर्ज की जा रही है. इसका परिणाम ये है कि जो नए बच्चे पैदा हो रहे हैं, उनका लिंग छोटा हो रहा है.

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उन्होंने कहा हमारा आधुनिक समाज बुरी तरह से स्पर्म को ख़राब कर रहा है, महिला और पुरुष दोनों की प्रजनन क्षमता पर इसका इसर देखने को मिल रहा है. ये संकट आने वाले वक़्त में इंसानों के अस्तत्व पर ही संकट पैदा कर देगा. 

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डॉ. स्वान का शोध phthalate सिंड्रोम की जांच से शुरू हुआ. उन्होंने चूहे पर रिसर्च किया, जिसमें देखा गया कि जब भ्रूण रसायन के संपर्क में आता है, तो गर्भ में पल रहे बच्चों का लिंग छोटा कर देता है. उन्होंने पाया कि केमिकल की वजह से anogenital डिस्टेंस छोटा हो जाता है और इसका असर गर्भ में पल रहे बच्चे पर दिखाई देता है.

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प्लास्टिक को अधिक लचीला बनाने के लिए कैमिकल का औद्योगिक उपयोग होता है, लेकिन डॉ. स्वान का कहना है कि वो खिलौने, प्लास्टिक या फिर खाने के जरिए इंसानी शरीर में आ जाता है और फिर मानव विकास को नुक़सान पहुंचाता है. साथ ही, इस रसायन का असर महिलाओं की प्रजनन क्षमता पर भी पड़ता है. क्योंकि गर्भाशय में जाकर हार्मोन्स को बनने से रोकता है. 

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बता दें, 2017 में हुई एक स्टडी के अनुसार, वेस्टर्न कंट्रीज में मर्दों के स्पर्म लेवल में पिछले चार दशकों में 50 फ़ीसदी से ज़्यादा गिरावट आई है. ऐसे में डॉ. स्वान का कहना है कि तेजी से घटती प्रजनद दर का मतलब है कि 2045 तक अधिकांश मर्दों के स्पर्म में प्रजनन करने की क्षमता नहीं होगी.