‘धड़कती ज़िंदगियां तड़पती मौत में बदल गईं

    शहर में निज़ाम बड़ा तब्दीली पसंद है’

कल तक जो देश की रीढ़ थे, आज वो ख़ुद सहारे के मोहताज हो गए हैं. सिर पर छत नहीं, हाथ में काम नहीं, जेब में पैसा नहीं फिर पेट में खाने की बात ही क्यों करें. दूसरा शहर, महामारी और सरकारों का उन्हें बेसहारा छोड़ देना, ऐसे में देश के हज़ारों-हज़ार प्रवासी मज़दूर घर लौटने को मज़बूर हैं. आलम ये है कि अपनों के बीच पहुंचने की चाह उन्हें ख़ुद की सांसों को भी अलविदा कहने पर मजबूर कर रही है. 

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एक तरफ़ ख़बर है कि उत्तर प्रदेश के औरेया में प्रवासी मज़दूर हादसे का शिकार हो गए, जिसमें 24 मज़दूरों की मौत हो गई. वहीं, दूसरी ओर एक परिवार है, जो गंभीर रूप से घायल बच्चे को स्ट्रेचर पर लेकर 1,300 किमी लंबे सफ़र पर निकला है. कुछ प्रवासी मज़दूर तो घर पहुंचने के लिए यमुना नदी के बीच में चलते नज़र आए हैं. मज़दूरों के पलायन का दर्दनाक सिलसिला जारी है. 

2 ट्रकों की भिड़ंत में 24 मज़दूरों की मौत 

उत्तर प्रदेश के औरेया में प्रवासी मज़दूर एक दुखद सड़क हादसे का शिकार हो गए हैं. जानकारी के मुताबिक़, इस हादसे में 24 मज़दूरों की मौत हो गई है, जबकि 50 से ज़्यादा घायल हो गए. ये मज़दूर एक ट्रक में सवार होकर राजस्थान और हरियाणा से अपने गांव जा रहे थे, लेकिन रास्ते में ही ट्रकों में भिड़ंत हो गई. बताया जा रहा है कि इसमें ज़्यादातर मज़दूर झारखंड, बिहार, पश्चिम बंगाल और यूपी के रहने वाले थे. 

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दरअसल, सुबह क़रीब 3 बजे के आसपास नेशनल हाईवे पर एक ढाबे के पास ट्रक में टकराने से दूसरा ट्रक अनियंत्रित हो गया, इस ट्रक में आंटे की बोरी लदी हुई थी और मज़दूर इन बोरियों के ऊपर बैठे हुए थे. हादसे में ज़्यादतर मज़दूर इन बोरियों में दब गए, जब तक उन्हें निकाला गया इनमें से कई ने दम तोड़ दिया था. इस हादसे में अब तक 24 लोगों के मरने की ख़बर है. वहीं, 50 से ज़्यादा घायल हुए हैं. 

मध्यप्रदेश में सड़क हादसे में 5 मज़दूरों की मौत 

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मध्यप्रदेश के सागर में भी बड़ी ट्रक दुर्घटना हुई है. यहां दलबतपुर से मज़दूरों को लेकर जा रहा ट्रक पलट गया. इस हादसे में 5 मज़दूरों के मरने की ख़बर है, जबकि 20 घायल हुए हैं. कुछ घायलों की हालत गंभीर बताई जा रही है. स्थानीय लोगों की मदद से घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया है. इनमें से ज़्यादतर मज़दूर महाराष्ट्र से बस्ती की ओर जा रहे थे. 

हैदराबाद से गोरखपुर आ रहे मज़दूरों का ट्रक दुर्घटनाग्रस्त 

हैदराबाद से 50 से ज़्यदा मज़दूर यूपी के गोरखपुर आ रहे थे. लेकिन तेलंगाना के निर्मल नाम के स्थान के पास राष्ट्रीय राजमार्ग-44 पर उनका ट्रक दुर्घटनाग्रस्त हो गया. 

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ये हादसा तेलंगाना-महाराष्ट्र बॉर्डर पर शनिवार सुबह 3.30 बजे हुआ. बताया जा रहा है कि घटना में एक मज़दूर की मौत और क़रीब 20 लोग घायल हुए हैं, जिनमें 9 की हालत गंभीर बनी हुई है. 

पोलिया से पीड़ित मज़दूर सूरत से यूपी के लिए पैदल रवाना 

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गुजरात के सूरत में पेटिंग का काम करने वाले मथुरा प्रसाद बिंद पोलिया से पीड़ित हैं. लॉकडाउन के चलते न ही रोज़गार बचा और न ही हाथ में कोई पैसा था. उस पर भी रोज़ मकान मालिक किराया न देने पर घर से बाहर निकालने की धमकी देता था. ऐसे में बिंद और उनके पांच दोस्तों ने पैदल ही सूरत से यूपी के प्रयागराज अपने घर वापस लौटने का फैसला किया. 1,258 किमी के बेहद मुश्क़िल सफ़र पर बिंद अपने दोस्तों के साथ निकल पड़े. बिंद ने अश्विनी कुमार रोड से कामरेज तक का 14 किमी का सफ़र 10 घंटे में तय किया, तब ही कामरेज क्रॉसरोड पर ड्यूटी पर तैनात पुलिसवाले की उस पर नज़र पड़ी और तब जाकर उसकी मदद की गई. 

‘मज़दूर एवं मजबूर’ साइकिल चुराने पर मज़ूदर ने लिखा पत्र 

जो हाथ मेहनत से मुल्क़ की तकदीर बदलते हों, वो अगर चोरी करने लगे तो ज़मीर का कचोटना जायज़ है. कुछ ऐसा ही राजस्थान के भरतपुर में प्रवासी मज़दूर मोहम्मद इक़बाल के साथ भी हुआ. इक़बाल को भरतपुर से यूपी के बरेली 250 किमी का सफ़र कर पहुंचना था. उनके साथ एक दिव्यांग बच्चा भी था. ऐसे में उन्होंने एक साइकिल चुरा ली. लेकिन उनका मन चोरी करने की गवाही नहीं दे रहा था, तो उन्होंने साइकिल मालिक के लिए एक पत्र लिख छोड़ा. 

उन्होंने लिखा, ‘मैं आपका गुनहगार हूं. मैं आपकी साइकिल लेकर जा रहूं. मुझे माफ़ कर देना. मुझे बरेली तक जाना है. मेरे पास कोई साधन नहीं है और दिव्यांग बच्चा है. मज़दर एवं मजबूर, मोहम्मद इक़बाल.’ 

बेटे की मौत, मज़दूर बाप तीन दिन तक यूपी के गेट पर फंसा रहा 

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बेटे के मौत की ख़बर पाकर एक पिता पैदल ही बिहार के बेगुसराय के लिए निकल पड़ा. रामकुमार दिल्ली के नवादा में मज़दूरी करते थे. उन्हें ख़बर मिली कि उनके एकलौते बेटे की मौत हो गई है, ख़बर सुनते ही वो ख़ुद को रोक नहीं पाए और पैदल ही बेगुसराय के लिए निकल पड़े. लेकिन वो तीन तक यूपी गेट पर ही फंसे रहे. गाज़ियाबाद पुलिस ने उन्हें आगे नहीं जाने दिया. वो अधिकारियों के आगे हाथ-पांव जोड़ते रहे, लेकिन उनकी बात किसी ने नहीं सुनी. इस उम्मीद में कि अधिकारियों को उन पर तरस आ जाएगी, वो गाज़ीपुर फ़्लाईओवर के नीचे ही बैठा रहा. एक बिलकते पिता की तस्वीर सोशल मीडिया से लेकर हर जगह सर्कुलेट हो गई, जिसके बाद जाकर रामकुमार अपने घर वापस पहुंच पाए. 

घायल बच्चे को स्ट्रेचर पर लेकर 1,300 किमी के सफ़र पर निकला परिवार 

पंजाब के लुधियाना से मध्यप्रदेश के सिंगरौली लौटता एक 17 लोगों का बड़ा परिवार, जिसके पास न पर्याप्त भोजन है न पैसा और न ही पैरों में चप्पल, ऊपर से साथ में एक घायल बच्चा है, जिसे खुद से बनाए स्ट्रेचर पर लादकर ले जा रहे हैं. सीरिंग रोड पर चल रहा ये परिवार घर लौटने के लिए 1,300 किमी के लंबे सफ़र पर निकला है. क़रीब 800 किमी का सफ़र करने के बाद इन्हें यूपी के कानपुर में पुलिस की मदद मिली और इन लोगों के लिए ट्रक की व्यवस्था की गई. 

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परिवार के एक सदस्य ने बताया कि उन्हें चलते हुए 15 दिन बीत गए. उन्होंने लुधियाना से चलना शुरू किया था, जहां वो दिहाड़ी मज़दूरी करते थे. घायल बच्चे के बारे में पूछने पर बताया कि उसकी गर्दन टूट गई है, जिसकी वजह से उसका शरीर काम नहीं कर रहा है. परिवार में बहुत से बच्चे हैं, लेकिन किसी ने भी इतने लंबे सफ़र के बावजदू पेट भर खाना नहीं खाया है. 

घर पहुंचने के लिए पैदल ही नदी पार करते मज़दूर 

सैकड़ों की तादाद में मज़दूर घर पहुंचने के लिए पैदल ही यमुना नदी को पार करते दिखाई दिए. कुछ के कंधों पर बैग थे तो कुछ के कंधों पर मासूम बच्चे. लेकिन हरियाणा से इन मज़दूरों को यूपी और बिहार में अपने घर लौटने के लिए नदी को पैदल ही पार करना पड़ा. दरअसल, यमुना नदी कुछ दूरी तक यूपी और हरियाणा सीमा के साथ बहती है. 

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बिहार का एक मज़दूर जो किनारे पर टायर-ट्यूब के साथ बैठकर अपनी बारी का इंतज़ार कर रहा था, उसने बताया, 'हमारे पास कोई दूसरा विकल्प नहीं है. हम क्या कर सकते हैं? हमारे पास अब कोई रोज़गार नहीं बचा.' 

बताया जा रहा है कि मज़दूरों ने नदी को पार करने का फ़ैसला किया क्योंकि कोरोना के चलते कई अंतर-राज्यीय सीमाओं को सील कर दिया गया है और अधिकारियों की अनुमति के बिना आवाजाही की अनुमति नहीं है. 

दुबई कमाने गए थे, अब दिल्ली से झारखंड साइकिल से लौटने को मजबूर

साइकिल पर 6 लोग तपती धूप में चले जा रहे हैं. जब उनसे पूछा गया कि वो कहां जा रहे हैं, तो मालूम पड़ा वो दुबई काम करने गए थे. वहां जिस कंपनी में काम करने गए थे, वो कोरोना वायरस के चलते बंद हो गई. वापस आए तो दिल्ली में लॉकडाउन के चलते फंस गए. 21 मार्च से वो शहर में ही फंसे रहे. ऐसे में उन्होंने क़रीब 1,200 किमी का सफ़र साइकिल से ही तय करने का फ़ैसला किया. उनका कहना है कि परिवार में परेशानी के चलते वो दुबई गए थे, लेकिन उनका सपना पूरा नहीं हुआ और अब वो वापस लौटने को मजबूर हैं. 

ये हालात पूरे देश में बने हैं. राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन ने प्रवासी मज़दूरों को सबसे ज़्यादा प्रभावित किया है. ये मज़दूर घरों से दूर बेहद मुश्क़िल हालात का सामना कर रहे हैं. ऐसे में ये पैदल, साइकिल, ऑटो, ट्रकों पर सवार होकर किसी तरह अपने गृहराज्य पहुंचना चाहते हैं. लेकिन सफ़ल लंबा है, न तो इनके पास पर्याप्त खाना है और न ही की साधन. कुछ के पास तो पैरों में एक जोड़ी चप्पल तक नहीं है. इसके बावजूद ये मज़दूर अपने घर पहुंचने के लिए निकल पड़े हैं और हर दूसरे दिन बेहद दर्दनाक हादसों का शिकार हो रहे हैं.