पुलिस (Police) वाले दिन-रात लोगों की सुरक्षा में मुस्तैद रहते हैं. त्योहार हों या फिर कोई भी सार्वजनिक प्रोग्राम उनकी ड्यूटी हमेशा लगी रहती है. 12-13 घंटे ड्यूटी करना उनके लिए अनकहा नियम बन चुका है. कोई आराम नहीं, मगर फिर भी उन्हें लोगों से वो सम्मान नहीं मिलता. चंद पुलिस वालों की ग़लत हरकतों को खामियाज़ा पूरी पुलिस फ़ोर्स को भुगतना पड़ता है. 

मगर आज हम आपको ऐसे पुलिस वालों के बारे में बताएंगे, जिन्होंने खाकी की इज़्ज़त और लोगों की सुरक्षा के लिए अपनी जान तक की परवाह नहीं की. इन्होंने आगे बढ़कर लोगों की जान बचाई, मदद की और पुलिस यूनिफ़ॉर्म की इज्ज़त बढ़ाई.

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1. मासूम को छाती से लगाकर आग की लपटों के बीच से निकला पुलिस वाला

राजस्थान के करौली में नव संवत्सर के अवसर पर रैली के दौरान हिंसा फैल गई थी. असामाजिक तत्वों द्वारा दुकानें जला दी गईं. हिंसा और आग के बीच फूटा कोट क्षेत्र स्थित दुकान में एक मासूम और दो महिलाएं भी फंस गईं. तभी इन पर करौली शहर चौकी पर तैनात कांस्टेबल नेत्रेश शर्मा की नजर पड़ी. कांस्टेबल नेत्रेश जलती आग के बीच उन्हें बचाने चले गए. 

उन्होंने महिलाओं के पास मौजूद दुपट्टे से मासूम को ढका और उसे गोद में उठाकर आग की लपटों के बीच तेजी से दौड़ते हुए बाहर निकले. जिस तरह नेत्रेश ने तीनों की जान बचाई उसकी हर जगह तरीफ़ हो रही है. नेत्रेश की बहादुरी को देख मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी उन्हें फोन कर बधाई और शुभकामनाएं दी. नेत्रेश को कांस्टेबल से हेड कांस्टेबल के पद पर पदोन्नत करने एलान किया है. 

2. 400 बच्चों की जान बचाने के लिए 10 किलो का बम लेकर 1 KM तक दौड़ा पुलिसवाला 

MP Police
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ये घटना साल 2017 में मध्य प्रदेश में घटी. सागर जिले स्थित चितोरा गांव के एक स्कूल में तोप का गोला मिला. आनन-फानन में पुलिस (Police) मौके पर पहुंची. मालूम पड़ा कि स्कूल में क़रीब 400 बच्चे मौजूद हैं. ऐसे में सिपाही अभिषेक पटेल ने तुरंत बम को उठा लिया और उसे रिहायशी इलाके से दूर ले जाने के लिए दौड़ पड़े. 

अभिषेक कंधे पर 10 किलो के बम को रखकर क़रीब 1 किमी दूर तक दौड़ गए. मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी इस पुलिस वाले की बहादुरी की सराहना की थी और उसे इनाम भी दिया था. 

3. 16 घंटे के अंदर बच्चे को किडनैपर्स से छुड़ाया

साल 2017 में तेलंगाना में एक मां सोकर उठी, तो उसने देखा कि किसी ने उसके 4 माह के मासूम बच्चे को किडनैप कर लिया. वो घबराकर तुरंत नंपली पुलिस स्टेशन पहुंची. पुलिस (Police) वालों को जैसी ही पता चला कि उन्होंने फ़ौरन सीसीटीवी फ़ुटेज खंगालनी शुरू की और महज़ 16 घंटे के अंदर अपराधियों को गिरफ़्तार कर मासूम की जान बचा ली. बच्चे को गोद में पकड़े इस कॉप की तस्वीर उस वक़्त काफ़ी वायरल हुई थी. 

4. उत्तराखंड में सब इंस्पेक्टर ने बुजुर्ग की बचाई जान

Uttrakhad Police
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एक तीर्थयात्री को पहाड़ पर चढ़ाई के दौरान हार्ट अटैक आ गया. ऐसे में उत्तरकाशी जिले के बरकोट पुलिस स्टेशन के सब-इंस्पेक्टर लोकेंद्र बहुगुणा ने 55 वर्षीय तीर्थयात्री को अपनी पीठ पर लाद लिया. वो उन्हें लेकर दो किमी तक चढ़े और प्राथमिक चिकित्सा केंद्र यमुनोत्री पहुंचाया. अगर लोकेंद्र थोड़ी भी देरी करते तो, मरीज़ की जान बचाना मुश्किल हो जाता.

5. मुस्लिम लड़के को भीड़ के हाथों मरने से पुलिसवाले ने बचाया

Police save life
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उत्तराखंड रामनगर में गिरिजा देवी का एक मशहूर मंदिर है. यहां एक कपल छुपकर मंदिर में मिलने आया था. पूछताछ में मालूम चला कि लड़का मुसलमान है. लड़की हिंदू है. इसके बाद खूब हंगामा हुआ. भीड़ जुट गई. भीड़ उस मुस्लिम लड़के को पीटना चाहती थी. मगर ऐसा नहीं हुआ. सब-इंस्पेक्टर गगनदीप ने गुस्साई भीड़ और उस लड़के के बीच खड़े हो गए. भीड़ उस लड़के को मार देना चाहती थी. गगनदीप को भी धमकी दी. मगर वो पीछे नहीं हटे और लड़के को वहां से सुरक्षित निकाला.

6. महिला पुलिस (Police) इंस्पेक्टर ने बेहोश शख्स को कंधे पर डालकर हॉस्पिटल पहुंचाया

Female cop
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साल 2021 में तमिलनाडु में भारी बारिश का कहर हर जगह दिखाई दिया. चेन्नई में भी हर जगह पानी भर गया. इस दौरान बारिश में एक शख़्स बेहोश होकर सड़क पर पड़ा था. ऐसे में महिला पुलिस इंस्पेक्टर राजेश्वरी ने कंधे पर डालकर रेस्क्यू किया. उन्होंने रास्ते पर पड़े एक बेहोश आदमी को अपने कंधों पर उठाकर उसे अस्पताल तक पहुंचाया.

7. दिल्ली पुलिस के ASI ने महामारी के दौरान 1,000 से ज़्यादा लोगों का दाह संस्कार करने में की मदद

Delhi Police

कोरोना महामारी के दौरान लाखों लोग मारे गए. ऐसे वक़्त में डर से लोग अंतिम संस्कार तक नहीं कर पा रहे थे. उस दौरान दिल्ली पुलिस के ASI असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर (ASI) राकेश कुमार नायक बनकर उभरे. हजरत निजामुद्दीन पुलिस स्टेशन में तैनात इस पुलिस वाले ने लोधी रोड श्मशान में लोगों की अपने प्रियजनों का अंतिम संस्कार करने में मदद की. उन्होंने 1,000 से ज़्यादा लोगों के दाह संस्कार में सहायता दी. इस काम के चलते उन्होंने अपनी बेटी की शादी तक आगे बढ़ा दी थी. राकेश कुमार को इस बात की भी परवाह नहीं थी कि कहीं इस काम में वो भी संक्रमित न हो जाएंं.

ऐसे जांबाज़ पुलिस (Police) वालों को पूरा इंडिया सैल्यूट करता है.