सरकार की ओर से 21 दिन के लॉकडाउन के एलान के बाद पूरे देश में प्रवासी मज़दूर बेसहारा हो गए हैं. रोज़गार ख़त्म, हाथ में बचत नहीं साथ ही ट्रांसपोर्ट व्यवस्था रुक गई, जिसके सहारे वो अपने घर-गांव वापस जा सकते थे. हज़ारों की संख़्या में ये मज़दूर पैदल ही घर को निकल पड़े. मगर कुछ ऐसा नहीं कर पाए. ऐसे वक़्त में वेलाचेरी में गुरु नानक कॉलेज ने चेन्नई में फंसे देश भर के प्रवासी मज़दूरों के लिए अपने दरवाजे खोल दिए हैं.

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कॉलेज के अधिकारियों ने बताया कि, वर्तमान में ग्रेटर चेन्नई कॉर्पोरेशन द्वारा लाए गए 350 लोगों के रहने की व्यवस्था की गई है. लेकिन आने वाले दिनों में अधिकतम 1,000 लोग यहां रह सकते हैं.

सोमवार शाम को आलू, पूरी और डिनर में एक सब्ज़ी दी गई थी. वहीं, मंगलवार को रोटी, चावल और सांभर परोसा गया था.

newindianexpress की रिपोर्ट के मुताबिक़, गुरु नानक एज़ुकेशन सोसाइटी के महासचिव और संवाददाता मंजीत सिंह ने बताया कि, ‘जिन लोगों के पास कहीं और जाने की व्यवस्था नहीं है, हम उन्हें तीन वक़्त का खाना खिलाना चाहते हैं. जिन प्रवासी मज़दूरों और बेघर लोगों ने सरकार से मदद मांगी है, हमने उनके इंतज़ाम के लिए अपनी अधिकांश कक्षाओं को फिर से तैयार किया है.’

उन्होंने कहा कि जब से कॉलेज प्रवासी मज़दूरों के लिए एक आवास प्रदान करने के लिए सहमत हुआ, तब से उन्हें विभिन्न संगठनों से भारी मदद और समर्थन मिला है. साथ ही ऐसे लोग भी मदद के लिए सामने आ रहे हैं, जिनसे वो कभी नहीं मिले.

‘हर सुबह 7 बजे, हम मॉडर्न बेकरी से चाय और दो बन्स देते हैं, सुबह 11:30 बजे, हम दोपहर के खाने में चावल, दाल और सब्ज़ी देते हैं और हम शाम 6:30 बजे रात का खाना देते हैं. साथ ही साइट पर तैनात स्वयंसेवक, निगम के अधिकारी और पुलिस अधिकारी भी प्रवासी मज़दूरों को दिए गए भोजन को खाते हैं.’

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सामाजिक दूरी बनाए रखने के लिए, जिस क्लास में 70-80 पढ़ते हैं वहां केवल 15 लोगों को ही ठहराया जा रहा है. मज़दूर बेंच पर ही सोते हैं. यहां रहने वालों को बगीचे और छत पर जाने की अनुमति है, पर भीड़ नहीं लगा सकते हैं.

नैयर ने बताया कि, ‘हमने उन महिलाओं और तीर्थयात्रियों के लिए एक अलग ब्लॉक भी तैयार किया है, जो चेन्नई सेंट्रल स्टेशन पर फंसे हुए थे. साथ ही यहां रहने वालों का मनोरंजन किस तरह किया जाए, इस पर भी स्वयंसेवक विचार कर रहे हैं.’

चेन्नई कॉर्पोरेशन के सैनिटरी कर्मचारी जगह को स्वच्छ करते रहते हैं. उन्होंने कहा, ‘प्रवासी कामगार तब तक यहां रह सकते हैं, जब तक लॉकडाउन है. हम अगले शैक्षणिक सत्र के लिए छात्रों के वापस आने से पहले इस जगह की सफ़ाई और इसे उनके लिए तैयार करने में सक्षम हैं.’