केरल के कन्नूर में एक ऐसी शॉप खुली है, जिसमें न तो कोई शॉपकीपर है और न ही कोई सेल्समैन. यहां आपको अपनी ज़रूरत का सामान ख़रीद कर उसके पैसे एक बॉक्स में डालने पड़ते हैं. बात कुछ हज़म नहीं हुई, ऐसे कैसे कोई दुकान बिना दुकानदार के चल सकती है?


पहले हमें भी ऐसा लगा था, लेकिन जब इस दुकान को खोलने के पीछे की वजह पता चली, तो हमारे मन में दुकान के ओनर के लिए इज़्ज़त और बढ़ गई.

इस साल 1 जनवरी को कन्नूर के Vankulathuvayal इलाके में इस दुकान को शुरू किया गया था. बिना दुकानदार वाली ये इस इलाके की इकलौती शॉप है. लेकिन यही इसकी विशेषता नहीं है. सबसे बड़ी बात ये है कि इस दुकान में मिलने वाला हर सामान दिव्यांग लोगों द्वारा बनाया जाता है.

इस दुकान को जनशक्ति ट्रस्ट नाम की एक संस्था चलाती है, जो इलाके में दिव्यांग लोगों के कल्याण के कार्यों के लिए प्रसिद्ध है. दरअसल, उनके पास ऐसे कई लोग है, जो विक्लांग होते हुए भी रोज़मर्रा की ज़रूरतों का सामान बनाते हैं लेकिन उनके प्रोडक्ट को जल्दी कोई विक्रेता ख़रीदने को तैयार नहीं होता.

इसी समस्या का उपाय इस ट्रस्ट ने बिना दुकानदार वाली दुकान के रूप में निकला. इस दुकान को चलाने में आस-पास के सब्ज़ी विक्रेता मदद करते हैं. वो सुबह 6 बजे इसे खोल देते हैं और रात को 10 बजे बंद भी करते हैं. किसी प्रकार की गड़बड़ न हो इसके लिए यहां सीसीटीवी भी लगाए गए हैं.

इसके दरवाज़े पर ही एक बोर्ड लगा हुआ है, जिसमें लिखा है- 'इस दुकान में कोई भी शॉपकीपर नहीं है और न ही कोई सेल्स मैन. आप यहां से जो चाहे ख़रीद सकते हैं, बस आपको सामान पर लिखे प्राइस को यहां रखे बॉक्स में डाल देना है.'

जनशक्ती ट्रस्ट के संस्थापक सुगुनन पीएम ने द बेटर इंडिया से बात करते हुए कहा- 'इस दुकान को इलाके के लोगों का पूरा सपोर्ट मिल रहा है. हमें इस तरह की और भी शॉप खोलने के ऑफ़र मिले हैं. हमारी संस्था दिव्यांग लोगों से ख़रीदे गए सामान का पहले ही भुगतान कर देती है, ताकी उन्हें कोई आर्थिक दिक्कत न हो. अच्छी बात ये है कि दुकान की सेल्स दिन-पर दिन बढ़ती ही जा रही है और हमें भी उन्हें पहले पेमेंट करने में कोई परेशानी नहीं हो रही है.'

सुगुनन का कहना है कि वो बहुत जल्द ही कन्नूर के कोझिकोड़ एरिया में भी ऐसी एक शॉप खोलने की तैयारी कर रहे हैं.


हैं कितना अच्छा Initiative!

कितना अच्छा हो अगर देश के दूसरे इलाकों में भी ऐसी ही दुकानें खुल जाएं.