आंध्र प्रदेश के तिरुपति स्थित दुनिया का सबसे अमीर मंदिर ट्रस्ट 'तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम' (टीटीडी) अपने कर्मचारियों को वेतन देने में असमर्थ है. ये ट्रस्ट तिरुपति स्थित मशहूर श्री वेंकटेश्वर मंदिर चलाता है.

तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम ट्रस्ट कहना है कि लॉकडाउन के चलते उसे 400 करोड़ रुपये का घाटा हुआ है. ट्रस्ट के पास कर्मचारियों का वेतन और दैनिक खर्चों को पूरा करने के लिए पर्याप्त नकदी नहीं है.

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तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम ट्रस्ट के अंतर्गत कई मंदिर आते हैं. इनमें भारत का सबसे अमीर मंदिर तिरुपति बालाजी भी शामिल है. मंदिर ट्रस्ट को हर साल भक्तों से करोड़ों रुपये का दान मिलता है. इस बार लॉकडाउन के चलते भक्तों के दर्शन पर पाबंदी लगी हुई है, जिसके चलते ट्रस्ट को करोड़ों का नुक्सान हो रहा है.

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टीटीडी के अधिकारियों का कहना है कि ट्रस्ट ने पहले ही वेतन, पेंशन, और अन्य निश्चित ख़र्चों के लिए लगभग 300 करोड़ रुपये ख़र्च कर दिए हैं. वो फ़िलहाल अपने 8 टन सोने के आरक्षित भंडार और 14,000 करोड़ रुपये की सावधि जमाओं के बिना ही इस संकट से उभरने के तरीकों पर विचार-विमर्श कर रहा है.

टीटीडी ट्रस्ट को हर महीने वेतन और पेंशन के लिए 120 करोड़ रुपये का भुगतान करना पड़ता है. ट्रस्ट ने साल 2020-21 के लिए Human Resources का भुगतान 1,385.09 करोड़ रुपये रखा है. जबकि ट्रस्ट द्वारा चलाए जा रहे 'स्वास्थ्य सेवा संस्थान' को भी 400 करोड़ रुपये का अनुदान दिया गया है.

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1300 कर्मचारियों को निकाला था

नौकरी से हाल ही में तिरुपति बालाजी मंदिर अपने 1300 कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों को नौकरी से निकाले जाने को लेकर चर्चा में था. ये लोग मंदिर ट्रस्ट के 3 गेस्ट हाउस विष्णु निवासम, श्रीनिवासम और माधवम में कई सालों से आव-भगत और सफ़ाई का काम करते थे. बीते 30 अप्रैल को इनका कॉन्ट्रैक्ट ख़त्म हो गया था.