आंध्रप्रदेश के श्रीकाकुलम के रहने वाले बुज़ुर्ग गेडेला इंदिरा प्रसाद ग़रीबों के लिए मसीहा बनकर सामने आए हैं. इस उम्र में भी ये शख़्स निःस्वार्थ भाव से ज़रूरतमंदों की मदद करने में जुटे हुए हैं.  

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दरअसल, साल 2006 में फ़िजिकल निदेशक के तौर पर सेवानिवृत्त हुए गेडेला इंदिरा प्रसाद ने 2000 में बीमारी के चलते अपनी पत्नी को खो दिया था. अब वो ज़रूरतमंदों की मदद करने के लिए अपनी पत्नी की पेंशन का इस्तेमाल करके उनके सपने को साकार करने का नेक काम कर रहे हैं.   

The New Indian Experss की रिपोर्ट के मुताबिक़, इंदिरा प्रसाद की पत्नी ललिता देवी पेशे से लेक्चरर थीं. वो 'श्रीकाकुलम रोटरी क्लब' से जुड़े रहने के दौरान सक्रिय रूप से समाज सेवा किया करती थीं. ललिता देवी के चले जाने के बाद इंदिरा प्रसाद ने इस नेक कार्य को जारी रखा है. 

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ललिता देवी सरकारी कॉलेज में लेक्चरर थीं. इसलिए उन्हें पेंशन के तौर पर 30,000 रुपये मिलते थे. अब इंदिरा प्रसाद हर महीने मिलने वाले पेंशन के सारे पैसे ग़रीबों की मदद के लिए दान कर देते हैं. इस मदद से कई ग़रीब बच्चों को अच्छी शिक्षा मिल पा रही है और कइयों के सपने साकार भी हो रहे हैं. 

हर महीने दान करते हैं 30 हज़ार रुपये  

इंदिरा प्रसाद ग़रीब छात्रों की स्कूल फ़ीस भरने के लिए अपनी पत्नी की पेंशन के 30 हज़ार रुपये का इस्तेमाल करते हैं. इसके अलावा वो प्रतियोगिताओं में भाग लेने वाले ग़रीब तबके के खिलाड़ियों की यात्रा का ख़र्चा भी उठाते हैं. इसके अलावा भी वो कई अन्य नेक काम कर रहे हैं. 

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इंदिरा प्रसाद का कहना था कि अलग-अलग जातियों के होने के बावजूद उस दौर में ललिता और मैंने प्रेम विवाह किया था. मेरी पत्नी उड़िया भाषा की लेक्चरर थीं. साल 2000 में लंबी बीमारी के कारण उनका निधन हो गया.