पीएम मोदी और जापान के प्रधानमंत्री शिंजो Abe गुरूवार को अहमदाबाद में भारत की पहली बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट की नींव रखी. सरकार का कहना है कि बुलेट ट्रेन टेक्नोलॉजी रेलवे को बदल कर रख देगी. हालांकि, आलोचकों का कहना है कि बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट के लिए ख़र्च किये जा रहे भारी भरकम फ़ंड का अगर मौजूदा रेलवे सिस्टम के सुधार के लिए उपयोग होने लगे तो बेहद कम दामों में चीज़ें बेहतर हो सकती हैं. हाल ही में कई ट्रेन हादसे आलोचकों की बात का समर्थन भी करते हैं.

खैर, मुंबई अहमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट से जुड़ी बातें कुछ इस प्रकार हैं.

टॉप स्पीड और किराया

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बुलेट ट्रेन की टॉप स्पीड 320- 350 किलोमीटर प्रति घंटा होगी. इससे मुंबई के अहमदाबाद के बीच की दूरी को लगभग 2 घंटों में पूरा किया जाएगा. आज की तकनीक के हिसाब से मुंबई से अहमदाबाद के बीच 7-8 घंटे लगते हैं. इस ट्रेन का किराया 3000 रुपये से लेकर 5000 रुपये के बीच हो सकता है.

यात्रियों के पास दो स्पीड ऑप्शंस होंगे:

हाई स्पीड : इससे 2.58 घंटों में मंजिल तक पहुंचा जा सकेगा.

रैपिड हाई स्पीड : इसमें मंजिल तक 2.07 घंटों में पहुंचा जा सकेगा.

बुलेट ट्रेन का रूट

अहमदाबाद मुंबई बुलेट ट्रेन के लिए 12 स्टेशनों के प्रस्तावों पर विचार किया जा रहा है. इनमें मुंबई, थाने, विरार, Boisar, वापी, बिलीमोरा, सूरत, वडोदरा, आनंद, अहमदाबाद और साबरमती शामिल हैं.

रेलवे को इस प्रोजेक्ट के लिए सिर्फ़ 825 हेक्टेयर ज़मीन की ज़रूरत होगी क्योंकि इस प्रोजेक्ट का 92 प्रतिशत हिस्सा Elevated होगा, 6 प्रतिशत हिस्सा सुरंग के अंदर से होकर गुज़रेगा और सिर्फ़ 2 प्रतिशत हिस्से के लिए ज़मीन की ज़रूरत होगी.

21 किलोमीटर लंबी ये सुरंग भारत की सबसे लंबी सुरंग होगी और ये मुंबई के Boisar और BKC के बीच होगी. इसमें से 7 किलोमीटर सुरंग समुद्र के अंदर होगी.

ट्रेन के ट्रैक्स अपने ज़्यादातर Routes पर 18 मीटर तक Elevate हो सकेंगे ताकि ये सुनिश्चित किया जा सके कि ट्रेन मौजूदा रेलवे रूट पर दौड़ती रहे. इसके अलावा बचे 40 किलोमीटर का थाने और वसई का स्ट्रेच, समुद्र में तय किया जाएगा और मुंबई में ये अंडरग्राउंड किया जाएगा.

2050 तक हर रोज़ डेढ़ लाख यात्री बुलेट ट्रेन से करेंगे यात्रा?

शुरूआत में हर हाई स्पीड ट्रेन के पास 10 कारें होंगी और इसमें 750 लोग एक बार में यात्रा कर सकेंगे. एक रिपोर्ट के मुताबिक, इसे बढ़ाकर 16 कार और 1200 लोग किया जाएगा. शुरूआती आंकड़ों के आधार पर माना जा रहा है कि बुलेट ट्रेन से हर साल लगभग 1 करोड़ 60 लाख लोग यात्रा करेंगे. आंकड़ों के हिसाब से, 2050 तक आते-आते हर रोज़ 1 लाख 60 हज़ार लोगों बुलेट ट्रेन में यात्रा कर रहे होंगे.

कब होगी बन कर तैयार?

508 किलोमीटर लंबी मुंबई से अहमदाबाद हाई स्पीड रेल (MAHSR) को शेड्यूल के हिसाब से दिसंबर 2023 में बन कर तैयार हो जाना चाहिए, लेकिन इसके निर्माण की तारीख को लगभग डेढ़ साल पहले अगस्त 2022 में कर दिया गया है.

जापान करेगा 88 हज़ार करोड़ की Funding

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बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट, 1 लाख 10 हज़ार करोड़ का एक महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट है. इसे फ़ंड करने के लिए जापान से 88,000 करोड़ का लोन लिया जाएगा. जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी (JICA) इसे फ़ंड करने जा रही है और इस पर हर साल 0.1% का Interest दिया जाएगा. भारत को ये लोन जापान को पचास सालों में चुकाना होगा जिसमें 15 साल का अतिरिक्त समय दिया जा सकता है.

सरकार का दावा, बुलेट ट्रेन से 15 लाख नई नौकरियों की होगी पैदावार

सरकार का मानना है कि इस बुलेट ट्रेन से देश में 15 लाख नई नौकरियां होंगी. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के हिसाब से एक हाई स्पीड रेल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट खास तौर से बुलेट ट्रेन की बारीकियां समझने के लिए खोला जाएगा. इस इंस्टीट्यूट में बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट के 4000 टेक्नीकल स्टाफ़ को प्रशिक्षण दिया जाएगा. जापानी सरकार ने इसके अलावा भारत के रेलवे अधिकारियों को जापान में ट्रेनिंग करने का ऑफ़र भी दिया है. जापान की यूनिवर्सिटीज़ में मास्टर्स कोर्स के लिए अधिकारियों के लिए सीटें रिज़र्व की जा सकती हैं.

बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट 2.0

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इसके अलावा भी भारतीय रेलवे एक और प्रोजेक्ट शुरू करने जा रही है. दिल्ली टू अमृतसर वाया चंडीगढ़ चलने वाली ये ट्रेन देश की दूसरी सबसे तेज गति से चलने वाली ट्रेन होगी. ये ट्रेन Standard Broad gauge पर ही चलेगी और इसे 2024 में खत्म हो जाने की उम्मीद की जा रही है. ये ट्रेन 458 किलोमीटर लंबे रूट को 300-350km प्रति घंटे की रफ़्तार से ढाई घंटे में कवर कर लेगी. इन ट्रेनों में स्टेशन के तौर पर अंबाला, चंडीगढ़, लुधियाना, जालंधर का नाम शामिल है. इस ट्रेन का किराया शताब्दी AC एक्ज़क्यूटिव क्लास जितना ही होगा.

शिंकासेन तकनीक, एक मिनट भी नहीं होगी ट्रेन लेट

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जापान को हाई स्पीड रेल नेटवर्क का सरताज माना जाता है और जापान की शिंकासेन बुलेट ट्रेन को दुनिया की सबसे तेज़ चलने वाली ट्रेन में शुमार किया जाता है. भारत को भी शिंकासेन तकनीक ही मुहैया कराई जाएगी, लेकिन इसके मैनुफ़ैक्चरिंग पार्ट्स को देश में मेक इन इंडिया के तहत बनाया जाएगा.

शिंकासेन का मतलब न्यू ट्रंक लाइन है. ये वो ट्रेन है जिसकी शेप बुलेट जैसी है और ये 320 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ़्तार से दौड़ सकती है. शिंकासेन को द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से किसी भी देश के विकास और तकनीकी तौर पर तरक्की का प्रतीक माना जाता रहा है. शिंकासेन को जापान की सबसे सेफ़ और समय की पाबंद ट्रेन के रूप में शुमार किया जाता है. ये ट्रेन 1964 के बाद से किसी भी दुर्घटना का हिस्सा नहीं बनी है. ट्रेन अगर एक मिनट भी लेट हो तो स्टाफ़ से जवाब तलब किया जाता है.