Hindustan Times में छपी ख़बर के मुताबिक, हाल ही में श्रम मंत्रालय ने एक रिपोर्ट जारी की है, जिसमें दिय गए नए आंकड़ों के अनुसार, 2017-18 में भारत में बेरोजगारी की दर 6.1% थी. बेरोजगारी की ये दर Periodic Labour Force Survey (आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण) के अनुसार, ये आंकड़ा पिछले 45 सालों में अब तक का सबसे ज़्यादा आंकड़ा है.

इस रिपोर्ट में साफ़-साफ़ ये कहा गया है कि पिछले सालों में रोज़गार योग्य शहरी युवाओं का 7.8% हिस्सा बेरोज़गार था, जबकि ग्रामीण युवाओं में ये दर 5.3% थी. इसके अलावा, पूरे इंडिया में बेरोज़गार पुरुषों की दर 6.2% थी, जबकि महिलाओं के मामले में ये 5.7% थी.

The Hindu की रिपोर्ट के अनुसार, सांख्यिकी सचिव, प्रवीण श्रीवास्तव ने बताया कि पिछले रिकॉर्ड के साथ की गई तुलना ग़लत थी, क्योंकि वर्तमान में एक नए मैट्रिक्स का उपयोग किया गया था.

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उन्होंने कहा,

मैं ये दावा नहीं करना चाहता कि यह 45-वर्ष में कम या अधिक है. दरअसल, मुद्दा ये है कि ये एक अलग मैट्रिक्स है. 2017-18 से, आपको नियमित अनुमान मिलेंगे और इस (Labour Force Survey) को आधार के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है. जब हम मैट्रिक्स को बदलते हैं, तो तुलना करना बहुत मुश्किल होता है क्योंकि पहले के मैट्रिक्स के आधार पर उस वर्ष में पूर्वव्यापी विश्लेषण करने का कोई साधन उपलब्ध नहीं है.

17वीं लोकसभा चुनाव के परिणामों की घोषणा के बाद ये डेटा जारी किया गया, जब BJP बहुमत के साथ जीती, और परिणामस्वरूप नरेंद्र मोदी ने फिर से प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली.

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हालांकि, मुख्य सांख्यिकीविद्, प्रवीण श्रीवास्तव ने Economic Times को बताया कि रिपोर्ट में देरी राजनीतिक दबाव के कारण नहीं, बल्कि कार्यप्रणाली में बदलाव के कारण हुई है.

हम पिछली कार्यप्रणाली के आधार पर पूर्वव्यापी विश्लेषण नहीं कर सकते - हम पर कोई (राजनीतिक) दबाव नहीं था. पहले बेरोजगारी को मापने के लिए मासिक प्रति व्यक्ति आय का उपयोग करके किया जाता था - अब शिक्षा के अनुसार मापदंड होता है. हमने रिपोर्ट में कोई देरी नहीं की है, हम केवल नई जानकारी लाए हैं.
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हालांकि, हमारे देश में अकेले बेरोजगारी की दर ही नहीं है, जो गंभीर चिंता का विषय है. इसके अलावा, Central Statistics Office (CSO) के अनुसार, 2014-15 से भारत की GDP दर भी 5.8% रही, जो कि पिछले पांच सालों में सबसे कम है.

हाल ही में पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता पर आई सरकार से हम यही उम्मीद कर सकते हैं कि आने वाले समय में बेरोज़गारी की ये दर कम होगी और देश आर्थिक, व्यावसायिक, सांस्कृतिक हर क्षेत्र में आगे बढ़ेगा.