किसी नौकरीपेशा इंसान की सैलरी अगर एक दो-दिन लेट हो जाए, तो वो दोस्तों से उधार लेकर या फिर अपने खर्चों को कम कर किसी तरह मैनेज करेगा. लेकिन अगर किसी का वेतन दो महीने से न मिला हो, तो उसकी हालत क्या होगी? ऐसे में वो क्या करेगा, कुछ भी करेगा, लेकिन क्या वो भीख मांगने के बारे में सोच सकता है? मेरी तरह आपका भी जवाब न होगा, लेकिन मुंबई पुलिस के एक कांस्टेबल ने इससे परेशान होकर सीएम और अपने सीनियर्स से भीख मांगने की इजाज़त मांगी है.

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जी हां, मुंबई पुलिस के एक कांस्टेबल ने बाकायदा एक लेटर लिखकर महाराष्ट्र के सीएम और मुंबई पुलिस कमिश्नर से वर्दी में ही भीख मांगने की अर्ज़ी दी है. इस हवलदार का नाम दन्यनेश्वर अहीरराव है, जो शिव सेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे के घर की सुरक्षा में तैनात है. उसने सीएम देवेंद्र फ़डनविस और पुलिस कमिश्नर दत्तात्रय पडसलगीकर को दो महीने से वेतन न मिलने की शिकायत करते हुए, इस मुश्किल की घड़ी में भीख मांगने की अनुमति मांगी है.

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दरअसल, अहीरराव 20-22 मार्च तक छुट्टी लेकर अपने घर गया था. लेकिन इसी बीच उसकी पत्नी के पैर में फैक्चर हो गया और वो ड्यूटी पर नहीं लौट सका. उसने इस बारे में अपने सीनियर्स को बताया था और 5 दिन की अापातकालीन छुट्टी मांगी थी. इसके बाद वो 28 तारीख को वापस आया और ड्यूटी करने लगा.

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लेकिन बिना कोई कारण बताए उसका वेतन पिछले दो महीने से रोक लिया गया है. इससे परेशान होकर उसने ये पत्र लिखा है. इसमें अहीरराव ने लिखा है, ‘मुझे मेरी बीमार पत्नी के इलाज और माता-पिता के साथ ही बेटी का भी ख़र्च उठाना होता है. इसके अलावा मेरे द्वारा लिए गए लोन की मासिक किश्त भी देनी होती है. लेकिन पिछले 2 महीने से सैलरी न मिलने के कारण मेरी माली हालत बहुत ख़राब है, इसलिए आप मुझे वर्दी में भीख मांगने की इजाज़त दें.’

इस पूरे मामले पर जब डिप्टी कमिश्नर से पूछा गया, तो उन्होंने ये कहते हुए पल्ला झाड़ लिया कि ये मामले उनके अंडर नहीं एडमिनिस्ट्रेशन के अतंर्गत आता है. वहीं अहीराव से कोई संपर्क नहीं हो पाया है.

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एक पुलिस वाले से आम जनता को कई तरह की अपेक्षाएं होती हैं. शहर में लॉ एंड ऑर्डर और लोगों की सुरक्षा जैसा जिम्मेदाराना काम करने वाले को इस तरह हाशिए पर रखा जाएगा तो हम उनसे मुस्तैदी की उम्मीद कैसे कर सकते हैं.

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