मंदिर में प्यारे भगवान हैं और मंदिर के बाहर लोग ‘भगवान को प्यारे’ हैं. देश को आज़ाद हुए 70 साल से ज़्यादा का वक़्त बीत गया है, लेकिन हमारे ज़हन आज तक जाति के चंगुल से आज़ाद नहीं हुए हैं. संविधान नागरिकों की समानता के तमाम वादे करता है, लेकिन चौराहों पर सिर्फ़ भेदभाव ही नहीं होता, बल्क़ि हत्या तक कर दी जाती है. ताज़ा मामला उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले का है. यहां मंदिर में प्रवेश करने को लेकर चार लोगों ने कथित तौर पर एक 17 साल के दलित युवक को गोली मार दी.   

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बताया जा रहा है कि डोमखेड़ा गांव में विकास जाटव नाम का एक दलित युवक मंदिर में पूजा करने जा रहा था, तब ही ऊंची जाति के चार लोगों ने उसे अंदर जाने मना कर दिया. इस बात पर उन लोगों में बहस हो गई. विवाद इतना बढ़ गया कि आरोपियों ने उसे घर में घुसकर गोली मार दी.   

मृतक के पिता का कहना है कि ये घटना 31 मई की है. वहीं, आरोपियों की पहचान लाला चौहान, होराम चौहान, भूषण और जसवीर के रूप में हुई है.  

ये है पूरा मामला-  

विकास जाटव 31 मई को डोमखेड़ा स्थित मंदिर में पूजा करने गया, लेकिन कुछ लोगों ने उसे अंदर नहीं जाने दिया. इस बात पर उन लोगों में बहस हो गई. इसके बाद विकास ने उसी दिन पुलिस के पास शिकायत दर्ज कराई, लेकिन पुलिस ने चारों आरोपियों के ख़िलाफ़ कोई कार्रवाई नहीं की.   

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शनिवार की देर रात जाटव अपने घर के अंदर सो रहा था, जब चार आदमी अंदर आए और उस पर गोलियां चला दीं. गोलियों की आवाज़ सुनकर जाटव का परिवार उसे बचाने के लिए दौड़ा, जिसके बाद आरोपी भाग निकले. गोली लगने के बाद विकास को काफ़ी खून बह रहा था और अस्पताल पहुंचने से पहले ही उसने दम तोड़ दिया.  

पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है. The Times of India की रिपोर्ट के मुताबिक़, पुलिस ने लाला चौहान और होराम को पकड़ लिया, जबकि अन्य दो अभी भी फ़रार हैं. चारों आरोपियों के ख़िलाफ़ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 302 (हत्या) और एससी / एसटी अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है. अमरोहा के एसपी विपिन ताड़ा ने दावा किया कि मृतक और हमलावरों के बीच पहले से विवाद चल रहा था.