लॉकडाउन का चौथा फ़ेज़ जारी है. ऐसे में देशभर से प्रवासी मज़दूर अपने घरों को लौट रहे हैं. पैदल, साइकिल, ऑटो, ट्रक जैसे भी हो बस वो घर पहुंचना चाहते हैं. इनके पास न खाना है, न ही जेब में पैसा फिर भी ये चले जा रहे हैं. कई मज़दूर तो रास्ते में सड़क हादसों में अपनी जान तक गंवा चुके हैं. ऐसे में भी इन ग़रीब मज़दूरों को सरकार की तरफ़ से राहत मिलना तो दूर बल्कि उन्हीं के नुमाइंदे इनका सफ़र और भी कठिन बनाने पर तुले हैं. 

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दरअसल, हापुड़ का एक वीडियो वायरल हुआ है, जिसमें दो पुलिसवाले कथित तौर पर दो मज़दूरों की पिटाई कर रहे हैं और उन्हें ज़मीन पर लोटने के लिए मजबूर कर रहे हैं. 

बताया जा रहा है कि ये घटना उस वक़्त की है, जब दोनों मज़दूर अपने घर जा रहे थे. ये मज़दूर रेलवे पटरियों के किनारे-किनारे ही चलकर अपने गांव लौट रहे थे, तब ही इन्हें पुलिसवालों ने पकड़ लिया. इन्हें तपती धूप में सड़क पर लोटने के लिए मजबूर किया और वीडियो में एक सिपाही इन्हें डंडा मारता भी दिख रहा है. 

बतौर पुलिस, इसमें एक कॉन्स्टेबल है तो दूसरा होमगार्ड है. जब मज़दूर अपने घर जा रहे थे, तब इनकी नज़र मज़दूरों पर पड़ी. कॉन्स्टेबल और होमगार्ड की पहचान अशोक मीणा और शराफ़त अली के रूप में हुई है. 

एसपी सर्वेश मिश्रा ने कहा, ‘एक पुलिस कॉन्स्टेबल अशोक मीणा और एक होमगार्ड शराफ़त अली का दो मज़दूरों को सड़क पर लोटने के लिए मजबूर करने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है.’ 

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‘वीडियो का संज्ञान लेते हुए सिपाही को लाइन हाज़िर और होमगार्ड के ऊपर कार्रवाई के लिए कमांडेंट को रिपोर्ट भेजी गई है.’ 

फ़िलहाल मामले की जांच की जा रही है. ऐसे वक़्त में जब पहले से ही मज़दूरों पर परेशानियों का पहाड़ टूट पड़ा हो, उस समय उनके ख़िलाफ़ पुलिस की ऐसी निर्मम कार्रवाई को कतई स्वीकार नहीं किया जा सकता है. पुलिस को ध्यान रखना चाहिए कि थोड़ी सी सहानुभूति सैकड़ों मील के सफ़र पर निकले इन मज़दूरों के लिए बड़ी मदद होगी. हम उम्मीद ही कर सकते हैं कि भविष्य में किसी भी मज़दूर के साथ इस तरह की बर्बर घटना पेश न आए और वो सकुशल अपने घरों तक पहुंच जाएं.